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राम मंदिर के दानपात्र से करीब 5 से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी: पवन पांडेय नेता समाजवादी पार्टी व काग्रेस

उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया
आरोपियों की संपत्तियों में अचानक वृद्धि की जांच की जा रही है
आरोपियों की आय के स्रोतों और धन के लेन-देन की भी पड़ताल
मामले में आठ व्यक्ति नामजद
कानपुर: 28 जून 2026
लखनऊ : 28 जून 2026
राम मंदिर चोरी मामले में हाल के घटनाक्रम ने काफी ध्यान आकर्षित किया है। यह मामला तब शुरू हुआ जब 7 जून 2023 को समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय ने राम मंदिर के दानपात्र से करीब 5 से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी का आरोप लगाया। इसके बाद, हरकत में आते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया.
आरोपियों पर छापेमारी और गिरफ्तारी
इस मामले में आठ व्यक्तियों को नामजद किया गया है, जिनमें रमाशंकर यादव (टिन्नू), अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। ये सभी आरोपी मंदिर परिसर में दान की गई रकम के संदर्भ में कथित गबन के आरोपों का सामना कर रहे हैं.
पुलिस ने सभी आरोपियों के घरों पर संयुक्त रूप से छापेमारी की और उनके परिवार के सदस्यों से पूछताछ की। बैंक खातों और देशभर में इनके वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है.
संपत्ति में वृद्धि और गिरफ्तारियों की कार्रवाई
विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों की संपत्तियों में अचानक वृद्धि की जांच की जा रही है। इस संदर्भ में, पुलिस की SIT एक विस्तृत जांच कर रही है, जिसमें इन आरोपियों की आय के स्रोतों और धन के लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है.

अभी तक की जांच में, पुलिस ने ₹79 लाख 85 हजार रुपये बरामद किए हैं, जो इस मामले में महत्वपूर्ण सबूत माने जा रहे हैं। सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
कानूनी कार्रवाई

आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की कई धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें दंडनीय अपराध की गंभीरता के अनुसार संभावित सजा का प्रावधान है। आरोपियों की संपत्तियों को भी ध्यान में रखते हुए विशेष ध्यान दिया गया है कि क्या इनकी वृद्धि अवैध धन की ओर इशारा करती है.

राम मंदिर चोरी मामले में अब तक की जांच और गिरफ्तारी ने कई सवाल खड़े किए हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो, उत्तर प्रदेश सरकार और SIT पूरी तरह से समर्पित हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में निष्पक्षता और सख्ती की आवश्यकता पर जोर दिया है।.

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