यूपी की बेरोजगारी दर 8.1% : राष्ट्रीय औसत 6.5% से अधिक है.
स्थिति प्रमाणित करती है कि उत्तर प्रदेश में रोजगार की संभावनाएँ अत्यंत सीमित
भर्ती भाजपा सरकार के "रोज़गार मॉडल" की सच्चाई: कांग्रेस
सरकार को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकताकानपुर: 11 जून 2026
लखनऊ:11 जून 2026
उत्तर प्रदेश में बढ़ती बेरोज़गारी के मुद्दे पर विपक्ष ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। हाल ही में, UP पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में सिर्फ 32,679 पदों के लिए लगभग 29 लाख युवा प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जिससे हर एक पद के लिए लगभग 89 उम्मीदवार हो रहे हैं. यह स्थिति न केवल बेरोज़गारी का एक स्पष्ट संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि युवाओं को रोजगार पाने के लिए कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. मुख्य रूप से कांग्रेस ने इस भर्ती को भाजपा सरकार के "रोज़गार मॉडल" की सच्चाई के रूप में देखा है, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार रोजगार के अवसर प्रदान करने में विफल रही है. सामाजिक मीडिया और अन्य प्लेटफार्मों पर किए गए आरोपों में ये भी देखा गया कि कई युवा अन्य राज्यों से सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर इस परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, केवल एक नौकरी के लिए.विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया गया है, जहाँ मंत्री अनिल राजभर ने बेरोज़गारी के बारे में विपक्ष के सवालों का सामना किया. आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार प्रदेश में लगभग 30 प्रतिशत युवा बेरोज़गार हैं, जबकि CMIE की रिपोर्ट में 2023 में यूपी की बेरोजगारी दर 8.1 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत 6.5 प्रतिशत से अधिक है.
स्थिति प्रमाणित करती है कि उत्तर प्रदेश में रोजगार की संभावनाएँ अत्यंत सीमित हैं और सरकार को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। विपक्ष ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर सरकार इस समस्या का समाधान नहीं करती है, तो आगामी चुनावों में जनता इन मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराएगी^7.




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