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अमेरिकी सेना द्वारा मिसाइल हमला भारतीय नाविक आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पत्नाला सुरेश मारे गए:खेद या माफी न होने पर: भारत की प्रतिक्रिया में कई सवाल

'हमारे समझौता  प्रधानमंत्री' एक 'आज्ञाकारी सेवक' की तरह सुनते  और 'आदेशों' का पालन करते:राहुल गांधी 
 घटना भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव को बढ़ा सकती है
अमेरिकी कार्रवाई की निंदा करते समय  स्पष्ट और मजबूत स्थिति अपनाने की आवश्यकता है 
कानपुर: 14 जून 2026
नयी दिल्ली : 14 जून 2026
नयी दिल्ली, 14 जून (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों के मारे जाने के बाद अमेरिका के बयानों को लेकर रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि 'हमारे समझौता किए गए प्रधानमंत्री' एक 'आज्ञाकारी सेवक' की तरह सुनते हैं और 'आदेशों' का पालन करते हैं।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि 'समझौता करने वाला प्रधानमंत्री' देश के सम्मान की रक्षा नहीं करेगा क्योंकि वह देश का अपमान करने वालों के प्रति आभारी हैं।
    कुछ दिन पहले ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या का मामला सामने आया है। ये हमले अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ किए जा रहे नाकेबंदी अभियान का हिस्सा थे। भारतीय नाविकों की मौत पर भारत की प्रतिक्रिया में कई सवाल उठाए जा रहे हैं, खासकर अमेरिका की तरफ से खेद या माफी न होने पर।
10 जून 2026 को, ओमान तट के पास एक पलाउ-ध्वजांकित तेल टैंकर पर अमेरिकी सेना द्वारा मिसाइल हमला किया गया, जिसमें भारतीय नाविक आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पत्नाला सुरेश मारे गए[^
इस घटना के चलते भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बात की, जिसमें भारत ने इस हमले का कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने अमेरिकी राजदूत को तलब कर इस मामले पर निंदा की और इसे अस्वीकार्य बताया। हालांकि, कई विशेषज्ञों ने भारत की प्रतिक्रिया को नाकाफी बताया है, यह आरोप लगाते हुए कि अमेरिका भारतीय नागरिकों की जान को गंभीरता से नहीं ले रहा।
अमेरिका ने कहा है कि इन हमलों का कारण यह था कि जिन जहाज़ों पर हमला किया गया, वे अमेरिकी नाकेबंदी के नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दलील दी कि हमले से पहले जहाज़ों को चेतावनी दी गई थी。 कहने का तात्पर्य है कि अमेरिका ने अपने व्यवहार को उचित ठहराने का प्रयास किया है।
यह घटना भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव को बढ़ा सकती है, खासकर तब जब भारत अमेरिका के साथ और अधिक सहयोग कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय कानूनी संरचना के तहत इस तरह के हमले पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जो कि भारतीय नागरिकों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।
इस घटना ने भारत और अमेरिका के बीच की रणनीतिक साझेदारी की स्थिरता को चुनौती दी है। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और अमेरिका के आक्रामक सैन्य अभियानों के बीच संतुलन बनाए रखना एक जटिल मुद्दा बन गया है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
भारत को इस पूरे मामले में, अमेरिकी कार्रवाई की निंदा करते समय एक स्पष्ट और मजबूत स्थिति अपनाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसे मामलों से बचा जा सके।

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