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स्विट्जरलैंड ने भारत को दिया गया 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) का दर्जा निरस्त

स्विट्जरलैंड ने भारत को दिया गया 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) का दर्जा निरस्त 
 नेस्ले कंपनी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के  फैसले के बाद लिया गया है, 
 स्विट्जरलैंड में भारतीय कंपनियों पर  महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा

नई दिल्ली, 14 दिसंबर 2024

स्विट्जरलैंड में काम कर रही भारतीय कंपनियों को 1 जनवरी 2025 से शुरू होकर 10% अधिक कर का भुगतान करना होगा। यह कर बढ़ोतरी सीधे तौर पर उनके लाभ और निवेश पर असर डालेगी


भारत के लिए मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा निरस्त  करने के स्विट्जरलैंड के  फैसले से आईटी, फार्मा और वित्तीय सेवाओं में भारतीय निवेशक प्रभावित हो सकते हैं। यह व्यापार ढांचे को बाधित करता है जो भारत विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) एमएफएन सिद्धांत के तहत लाभ प्राप्त कर रहा था ।
स्विस सरकार ने भारत और स्विट्जरलैंड के बीच दोहरे कराधान बचाव समझौते (डीटीएए) में सबसे पसंदीदा राष्ट्र का दर्जा (एमएफएन) खंड को निलंबित कर दिया है, जिससे संभावित रूप से भारत में स्विस निवेश प्रभावित होगा और यूरोपीय राष्ट्र में काम करने वाली भारतीय कंपनियों पर अधिक कर लगेगा।
कंपनियों को अब लाभांश और अन्य आय पर 1 जनवरी, 2025 से प्रभावी 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर देना होगा।
स्विस वित्त विभाग के 11 दिसंबर के एक बयान के अनुसार  पिछले साल भारत के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद आया है कि जब कोई देश ओईसीडी में शामिल होता है तो एमएफएन खंड स्वचालित रूप से आरम्भ नही होता है यदि भारत सरकार ने पहले उस देश के साथ कर संधि पर हस्ताक्षर कर संगठन में शमिल किया हो । 
डब्ल्यूटीओ नियमों केअन्तर्गत एमएफएन का दर्जा वैश्विक व्यापार की आधारशिला है। यह अनिवार्य करता है कि देश सभी व्यापारिक साझेदारों के साथ समान व्यवहार करें, यह सुनिश्चित करें कि सबसे पसंदीदा साझेदार पर समान व्यापार टैरिफ, कोटा और नियम लागू हों। स्विट्जरलैंड द्वारा इसको निलंबित करने का अर्थ है कि भारतीय वस्तुओं और सेवाओं को अब उच्च टैरिफ, अतिरिक्त व्यापार बाधाओं और स्विस बाजार तक कम पहुंच का सामना करना पड़ सकता है।
थिंक-टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार, यह निलंबन स्विट्जरलैंड में काम करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए कर चुनौतियां पेश करता है, खासकर वित्तीय सेवाओं, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी जैसे क्षेत्रों में। जीटीआरआई के संस्थापक के अनुसार एमएफएन क्लॉज का निलंबन स्विट्जरलैंड में काम कर रही भारतीय कंपनियों के लिए  झटका है।
एक शेयर बाजार विश्लेषक के अनुसार, "निवेशकों को फार्मास्यूटिकल्स, आईटी, वित्तीय सेवाओं और इंजीनियरिंग सामान जैसे क्षेत्रों पर नजर रखने की जरूरत है।"
 मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा समाप्त होने से भारत और स्विट्जरलैंड के बीच डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (डीटीएए) में नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे कंपनियों को कर का अधिक बोझ उठाना पड़ेगा[
 इस बदलाव से भारतीय कंपनियों की स्विट्जरलैंड में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है, जिससे निवेशकर्ता साझेदारी और दीर्घकालिक निवेश की योजनाओं को निरस्त कर सकते है । 
भारत के अनुसार यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के सदस्य देशों के साथ व्यापार समझौते व स्विट्जरलैंड के साथ उसकी दोहरी कराधान संधि पर फिर से बातचीत की आवश्यकता हो सकती है।
स्विट्जरलैंड द्वारा भारत को MFN का दर्जा निलंबित करना भारतीय कंपनियों के लिए  चुनौती  है, विशेषकर टैक्‍स  में। यह कदम न केवल कर दारों में वृद्धि का कारण बनेगा, बल्कि संभावित रूप से स्विट्जरलैंड में निवेश को भी प्रभावित कर करेगा  निवेशकों के लिए  इससे कारोबार की स्थिरता और भविष्य के निवेश पर प्रभाव पड़ सकता है।

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