श्रम कोड वेतन संहिता, 2019
भारत में श्रम कानूनों में बड़े बदलावों में से एक, वेतन संहिता, 2019 (Code on Wages, 2019) है। यह संहिता श्रमिकों के लिए बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और उनके अधिकारों की सुरक्षा को सुनिश्चित करता है। यह चार मौजूदा कानूनों को एकीकृत करता है: वेतन भुगतान अधिनियम, न्यूनतम वेतन अधिनियम, बोनस भुगतान अधिनियम और समान पारिश्रमिक अधिनियम।
प्रमुख प्रावधान
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सार्वभौमिक न्यूनतम मजदूरी: सभी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन का कानूनी अधिकार प्राप्त है। यह प्रावधान संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के लिए लागू है, जिससे पहले लागू न्यूनतम वेतन की सीमाएं समाप्त हो चुकी हैं.
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वेतन का समय पर भुगतान: संहिता के तहत, नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन का भुगतान करना होगा। इसमें एक स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है कि वेतन का भुगतान किस आवृत्ति पर और किस समय सीमा के भीतर होना चाहिए.
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ओवरटाइम का प्रावधान: कोई भी नियोक्ता नियमित कार्य घंटों से अधिक काम करने पर कर्मचारी को दोगुना वेतन देने के लिए बाध्य है.
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लैंगिक समानता: यह संहिता समस्त लिंगों के लिए समान वेतन और कार्य की स्थिति को सुनिश्चित करती है। इसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को भी समाहित किया गया है.
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सामाजिक सुरक्षा: गिग श्रमिकों और प्लेटफार्म श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा के लाभों को प्राप्त करने का अधिकार है। इससे उनके काम की सुरक्षा और स्थायित्व बढ़ता है.
औपचारिकताएं और अनुपालन
वेतन संहिता, 2019 के तहत नियमों की संख्या को कम कर दिया गया है, जिससे नियोक्ताओं के लिए अनुपालन सरल हुआ है। 163 नियम घटकर 58 रह गए हैं और इसी प्रकार फॉर्मों की संख्या को 20 से घटाकर 6 किया गया है।
वेतन संहिता, 2019 का उद्देश्य भारत में श्रमिकों के लिए एक समान और न्यायपूर्ण वेतन प्रणाली स्थापित करना है। यह कानून न केवल नियोक्ताओं के लिए बल्कि श्रमिकों के लिए भी सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थिर कार्य वातावरण सुनिश्चित करता है। यह आर्थिक न्याय और मजदूरों की गरिमा को बनाए रखता है। इसके द्वारा श्रमिकों को उनके हक और संविधान में दिए गए मूल्यों के अनुसार, सामाजिक, आर्थिक और सामुदायिक सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास किया गया है।
इस प्रकार, श्रम कोड के माध्यम से, सरकार ने एक ऐसा ढांचा स्थापित करने का प्रयास किया है जो कर्मचारियों की सुरक्षा करते हुए औद्योगिक विकास को भी प्रोत्साहित करता है।


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