आईआईटी कानपुर में एक और आत्महत्या: 25 वर्षीय पीएचडी छात्र रामस्वरूप ईशराम ने हॉस्टल की छठी मंजिल से दी कूदकर जान

-राजस्थान के चुरू जिले के मूल निवासी और पत्नी तथा छोटी बेटी के साथ रहते थे।
-लंबे समय से अवसाद, एंग्जाइटी और स्किज़ोफ्रेनिया से जूझ रहे थे
- इलाज/काउंसलिंग ले रहे थे। 
-कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। 
-पिछले 22-23 दिनों में संस्थान की दूसरी आत्महत्या (पिछली 29 दिसंबर 2025 को हुई)। 
-पिछले 2 वर्षों में IIT कानपुर में 9 छात्र आत्महत्याएं: देश के IITs में सबसे ज्यादा 
-संस्थान ने शोक व्यक्त किया है, पुलिस जांच कर रही है। 
कानपुर: 21 जनवरी 2026
आईआईटी कानपुर में एक और दुखद आत्महत्या का मामला सामने आया है, जिसमें 25 वर्षीय पीएचडी छात्र रामस्वरूप ईशराम ने हॉस्टल की छठी मंजिल से कूदकर जान दी। यह घटना 20 जनवरी 2026 को हुई, और यह पिछले 22 दिनों में संस्थान में दूसरी आत्महत्या है, जिससे परिसर में चिंता और त्रासदी का माहौल बना हुआ है.
रामस्वरूप ईशराम, जो अर्थ विज्ञान विभाग में पीएचडी कर रहे थे, मूलरूप से राजस्थान के चुरू जिले के निवासी थे। वह अपनी पत्नी मंजू और बेटी के साथ आईआईटी कैंपस में रहते थे। घटना के समय, यह बताया गया कि वह अवसाद और चिंता के लक्षणों से ग्रसित थे, और उनका इलाज भी चल रहा था.
घटनाओं की इस प्रकार कीश्रृंखला ने IIT कानपुर की मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। पिछले कुछ वर्षों में संस्थान में आत्महत्या की यह नौवीं घटना है, जो यह संकेत करती है कि स्टूडेंट वेलफेयर और काउंसलिंग सेवाओं में सुधार की सख्त जरूरत है.
पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। छात्र के निधन के बाद, आईआईटी प्रशासन ने परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं.
आईआईटी कानपुर में एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संकट की स्थिति है, और छात्र समुदाय में तनाव और अवसाद के मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
कानपुर आईआईटी में हाल में हुई आत्महत्याओं की घटनाएं एक गहरी चिंता का विषय बन गई हैं। पिछले दो वर्षों में यह आत्महत्या की नौवीं घटना है, जिसमें से दिसंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच तीन छात्रों ने जान दी है। इस प्रकार की घटनाओं ने संस्थान की मानसिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और छात्र सहयोग व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
आत्महत्याओं के पीछे कई कारक हो सकते हैं। पहले की रिपोर्टों के अनुसार, छात्र अक्सर अपने व्यक्तिगत और अकादमिक दबावों का सामना करते हैं, और कई बार वे अपनी समस्याओं को साझा नहीं कर पाते, जिससे उनकी मानसिक स्थिति और खराब हो जाती है.
संस्थान ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जैसे कि ओपन हाउस आयोजनों का आयोजन और काउंसलिंग सेंटर में मनोवैज्ञानिकों की संख्या को बढ़ाकर 10 करना. फिर भी, इस तरह की घटनाओं का बार-बार होना संस्थान के लिए चिंताजनक है और यह संकेत देता है कि मानसिक स्वास्थ्य और छात्र समर्थन के क्षेत्रों में और सुधार की आवश्यकता है.
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें सभी की जिम्मेदारी है और सुनिश्चित करें कि कोई भी छात्र अकेला महसूस न करे। यह केवल एक छात्र की आत्महत्या का मुद्दा नहीं है, बल्कि एक ऐसे सिस्टम का भी है जो बड़ी होनहार प्रतिभाओं को संभालने में असफल दिखता है.

Post a Comment

0 Comments