• निवेशकों द्वारा $3.9 बिलियन का बहिर्वाह, बुलियन आयात में वृद्धि और चालू खाता घाटा जैसे दबाव
• आर्थिक सर्वेक्षण में रुपये को कम मूल्य वाला और निर्यात के लिए अच्छा बताया
• आरबीआई ने अस्थिरता को रोकने के लिए डॉलर बेचे।
• रुपया 93-94 तक जा सकता है, बजट और वैश्विक घटनाओं पर नजर
• भारत की जीडीपी वृद्धि के बावजूद, कैपिटल फ्लो और ग्लोबल ट्रेड रिस्क मैनेज की आवश्यकता
नई दिल्ली: 30 जनवरी 2026
भारतीय रुपया 91.9850 प्रति अमेरिकी डॉलर के नए सर्वकालिक निचले स्तर पर गुरुवार को,आ गया जबकि डॉलर सूचकांक अपने चार साल के निचले स्तर के करीब था। दबावों में इस वित्तीय वर्ष में अब तक विदेशी निवेशकों द्वारा $3.9 बिलियन का बहिर्वाह, बुलियन आयात में वृद्धि और वित्त वर्ष 2016 के लिए अनुमानित 7.4% जीडीपी वृद्धि के बावजूद चालू खाते का घाटा बढ़ना शामिल है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के आर्थिक सर्वेक्षण में रुपये को कम मूल्य वाला और निर्यात के लिए अच्छा बताया गया, जबकि आरबीआई ने 1 फरवरी के बजट से पहले अस्थिरता को रोकने के लिए डॉलर बेचे।
मुख्य कारणविदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का बहिर्वाह: चालू वित्त वर्ष (FY 2025-26) में अब तक इक्विटी से भारी निकासी हुई है। जनवरी में ही $3 बिलियन से अधिक का आउटफ्लो दर्ज किया गया, जबकि अप्रैल-दिसंबर 2025 में इक्विटी से नेट आउटफ्लो $3.9 बिलियन के करीब रहा। वैश्विक रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट, उच्च अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स और ट्रेड अनिश्चितताओं (जैसे US टैरिफ) ने इसे बढ़ावा दिया।
बुलियन (सोना) आयात में वृद्धि और मजबूत डॉलर डिमांड: आयातकों की हेजिंग और NDF मार्केट में डॉलर की मजबूती ने दबाव बढ़ाया।
चालू खाता घाटा (CAD): मजबूत GDP ग्रोथ (अनुमानित 7.4%) के बावजूद CAD बढ़ रहा है, क्योंकि गुड्स में ट्रेड डेफिसिट सर्विसेज और रेमिटेंस से पूरी तरह ऑफसेट नहीं हो पा रहा।
वैश्विक कारक: डॉलर इंडेक्स अपने चार साल के निचले स्तर के करीब था, लेकिन एशियाई मुद्राओं में व्यापक कमजोरी और US टैरिफ का असर पड़ा।आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 की टिप्पणीवित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 29 जनवरी को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में रुपये की कमजोरी पर कहा गया है कि:रुपया भारत की मजबूत आर्थिक बुनियादों (stellar fundamentals) को ठीक से रिफ्लेक्ट नहीं कर रहा — यह "पंचिंग बिलो इट्स वेट" है, यानी अंडरवैल्यूड है।
कमजोर रुपया फिलहाल "हर्ट" नहीं कर रहा, क्योंकि यह US के उच्च टैरिफ के असर को कुछ हद तक ऑफसेट करता है (एक्सपोर्ट्स को फायदा)।
लेकिन लंबे समय में स्थिर और मजबूत रुपया जरूरी है, खासकर Viksit Bharat के लक्ष्य के लिए।
रुपया 2025 में अंडरपरफॉर्म किया, मुख्यतः विदेशी कैपिटल फ्लो के सूखने से।RBI की भूमिकारिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अस्थिरता कंट्रोल करने के लिए हस्तक्षेप किया — ट्रेडर्स के अनुसार, लोकल स्पॉट मार्केट खुलने से पहले डॉलर बेचे गए ताकि रुपया 92 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे न जाए। RBI की यह रणनीति अस्थायी राहत देती है, लेकिन स्ट्रक्चरल इनफ्लो (जैसे FCNR डिपॉजिट्स) पर विचार चल रहा है।आगे क्या?कुछ एनालिस्ट्स (जैसे DBS, Goldman Sachs) का अनुमान है कि रुपया 93-94 तक जा सकता है।
बजट (1 फरवरी 2026) से पहले और वैश्विक घटनाओं (ट्रंप पॉलिसी, US फेड) पर नजर रहेगी।
हालांकि, भारत की GDP ग्रोथ मजबूत बनी हुई है, और सर्वेक्षण में FY26 के लिए 6.8-7.2% (कुछ जगह 7.4%) का अनुमान है।यह स्थिति भारत की अर्थव्यवस्था की रेजिलिएंस दिखाती है, लेकिन कैपिटल फ्लो और ग्लोबल ट्रेड रिस्क मैनेज करने की जरूरत है। अगर कोई स्पेसिफिक पहलू (जैसे बजट इम्पैक्ट या फ्यूचर फोरकास्ट) पर ज्यादा जानना हो, तो बताएं!
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