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Saturday, January 31, 2026

सत्य और अहिंसा शस्त्र धारक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन: प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की: सोशल मीडिया पोस्ट से

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन
उन्होंने ही सबसे पहले अछूतों को 'हरिजन' कहकर पुकारा।
प्रेम और भाईचारे की भावना से भारत की जनता के हृदय में अद्वितीय स्थान 
महात्मा गांधी की हत्या के बाद 1948 में ब्राह्मणों के खिलाफ दंगे हुए 
सुदर्शन न्यूज चैनल की डिवेट में महात्मा गांधी की हत्या को पुण्य का काम बता रहे संत

सोशल मीडिया पोस्ट से
कानपुर 31 जनवरी 2026
अम्बरीष शर्मा@AmbareeshAmby ·5m
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
Sabki Khabar @sabkikhabar
नाथूराम गोडसे भारत का पहला आतंकवादी... कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उनकी शहादत पर गोडसे को देश का पहला आतंकी करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस सोच ने गांधी की हत्या की...
Swatantra Dev Singh
30 जनवरी 2025 ·
महात्मा गांधी ही वो युग पुरुष हैं जिनके प्रति पूरा विश्व आदर की भावना रखता है। उन्होंने ही सबसे पहले अछूतों को 'हरिजन' कहकर पुकारा।
प्रेम और भाईचारे की भावना से भारत की जनता के हृदय में अद्वितीय स्थान बनाया।
विश्व में सत्य और अहिंसा का मार्ग प्रशस्त करने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन।Jasmer Bhateri @JasmerBhateri 4h
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@Aloksharmaaicc
बापू एक सोच, जिसे नफरत नही मिटा सकती: नेताप्रतिपक्ष श्री Rahul Gandhi शुक्रवार को महात्मा गांधी जी की पुण्य तिथि पर उन्हे नमन करते श्री राहुल गांधी, श्री Mallikarjun Kharge ,सांसद दीदी Priyanka Gandhi Vadra जी, "बापू एक व्यक्ति नही, बल्कि एक सोच है"जो कभी मिट नही
#जसमेर_भटेडी जगदा एन प्रधान @JagadaPradhan 23h
देश: राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने महात्मा गांधी के शहीद दिवस पर उनके आदर्शों को किया याद
BHARATIY (BORN IN HINDU INDIA) @Rashtr2024Hindu · 1h
Replying to @Dr_MonikaSingh_
और भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे अमर बलिदानियों की हत्या रुकवाने की क्षमता होते हुए भी उनके बारे में बात तक नहीं की गई इस तथाकथित महात्मा से। जनसमर्थन इसे मिला,जिससे साम्राज्य डरा हुआ था। किंतु इसने उनके बारे में नहीं सोचा, अमर बलिदानियों की हत्या में इस गांधी का योगदान भी था।
Grokग्रोक@grok 1h
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@Universe1839131 andऔर @ChandanSharmaG
महात्मा गांधी की हत्या के बाद 1948 में ब्राह्मणों के खिलाफ दंगे हुए थे, जिसमें हत्याएं, संपत्ति की क्षति और हिंसा की घटनाएं दर्ज हैं। इतिहासकारों के अनुसार, मरने वालों की संख्या सैकड़ों से हजारों तक अनुमानित है, लेकिन सटीक आंकड़े विवादित हैं। विकिपीडिया और अन्य स्रोत इसकी पुष्टि करते हैं, हालांकि इसे व्यापक रूप से चर्चित नहीं किया जाता।
Abhimanyu Singh@Abhimanyu1305 ·1h
सुदर्शन न्यूज चैनल की डिवेट में, महात्मा गांधी की हत्या को पुण्य का काम बता रहे संत।
B Rajput @brajput868 ·2h
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@ranvijaylive
महात्मा गांधी जी की हत्या के बाद जिस तरह ब्राह्मणों का नरसंहार हुआ उसके लिए कौन सी विचारधारा जिम्मेदार है! सिक्के के दोनों पहलू देखने का माद्दा होना चाहिए अन्यथा कुछ भी ना लिखें!
Sunil Sharma@SKSharma1july 2h
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@sanatani_6
साथियों, कांग्रेस की मदद के बिना मोहम्मद जिन्ना भारत पाकिस्तान का विभाजन भी नही करा पाता अगर विभाजन नहीं होता, तो हिंदू मुस्लिम दंगे भी नहीं होते और शायद महात्मा गांधी जी की हत्या भी नहीं होती जय हिंद
Jagoo janta @Jagoo_janta 2h
"सावरकर और संघ की मदद के बिना नाथूराम गोडसे कभी महात्मा गांधी की हत्या नहीं कर पाता।" - तुषार गांधी
महात्मा गांधी, जिन्हें "राष्ट्रपिता" के रूप में सम्मानित किया गया, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के मुख्य स्तंभों में से एक थे। उनके जीवन का सार सत्य, अहिंसा और समानता के सिद्धांतों में निहित है। गांधी जी ने न केवल भारत को ब्रिटिश राज से मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि उन्होंने पूरे विश्व को संघर्ष और शांति का एक नया मार्ग दिखाया। उनके सिद्धांतों ने न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम को दिशा दी, बल्कि उन्होंने इसे वैश्विक आंदोलनों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनाया, विशेषकर मानवाधिकार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में.
कानपुर 31 जनवरी 2026
महात्मा गांधी का जीवन समाज के कमजोर वर्गों की भलाई के लिए उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने सत्याग्रह के माध्यम से शांति और अहिंसा के सिद्धांतों का पालन करते हुए नागरिक असंतोष का एक नया रूप विकसित किया। उनका 1930 का नमक सत्याग्रह और 1942 में "अंग्रेजों भारत छोड़ो" आंदोलन जैसे आंदोलनों ने उन्हें एक प्रसिद्ध राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नेता बना दिया। उनके इन विचारों का प्रभाव आज भी आज के युवाओं और सामाजिक आंदोलनों में देखा जा सकता है.गांधी जी का शारीरिक और मानसिक बल अद्वितीय था। उन्होंने अपने जीवन में धार्मिक और राजनीतिक सीमाओं को पार करते हुए सभी समुदायों के साथ समानता और भाईचारा कायम करने का प्रयास किया। उनके विचारों में यह स्पष्ट था कि ढीली सीमाएं एक नई दुनिया की जरूरत को दर्शा रही हैं, जहां सभी का एक समान अधिकार है.महात्मा गांधी का प्रेरणादायक जीवन हमें यह सिखाता है कि कठिनाईयों का सामना करने के लिए सत्य और अहिंसा का रास्ता उपयोगी हो सकता है। उनका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, और यह हमसे अपेक्षा करता है कि हम अपने समाज को दर्जनों सुधारों के माध्यम से बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहें। इसलिए, महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि केवल उन्हें याद करने का एक दिन नहीं है, बल्कि उनके सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए एक निरंतर प्रेरणा है.महात्मा गांधी का जीवन और कार्य भारतीयों और पूरी मानवता के लिए एक अमिट धरोहर है, जो हमें प्रेरित करता है कि हम अपने जीवन में सत्य और अहिंसा का पालन करें, ताकि एक बेहतर और सशक्त समाज का निर्माण किया जा सके.
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