पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ध्वजारोहण किया
21 तोपों की सलामी के साथ भारतीय राष्ट्रध्वज फहराया
नागरिकों ने लोकतांत्रिक साझेदारी और संविधान के प्रति उनकी वचनबद्धता को दर्शाया
भारत का 77वाँ गणतन्त्र दिवस मनाया जा रहा है
कानपुर: 25 जनवरी 2026
भारत ने 26 जनवरी, 1950 को पहला गणतंत्र दिवस मनाया दिन भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था। इस दिन भारतीय संविधान लागू हुआ, जिससे भारत एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
गणतंत्र दिवस का पहला समारोह नई दिल्ली के राजपथ पर मनाया गया, जहाँ देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ध्वजारोहण किया। उन्होंने 21 तोपों की सलामी के साथ भारतीय राष्ट्रध्वज फहराया, जो एक ऐतिहासिक क्षण था।
सेना की परेड आयोजित की गई, जिसमें भारतीय सैन्य बलों की शक्ति और विविधता का प्रदर्शन किया गया। गणतंत्र दिवस परेड न केवल एक सैन्य शो था, बल्कि यह देश की सांस्कृति विविधता और औपनिवेशिक शासन से मुक्ति के प्रतीक के रूप में भी प्रकट हुआ।
गणतंत्र दिवस का यह अवसर केवल एक राष्ट्रीय उत्सव नहीं था, बल्कि यह एक ऐसा दिन था जब लोगों ने अपने अधिकारों और विधियों को स्वीकार किया, जिसने उन्हें अपने देश की राजनीति में भाग लेने का अधिकार दिया। यह दिन संविधान के महत्व को भी उजागर करता है, जो भारतीय नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे का अधिकार प्रदान करता है।
26 जनवरी, 1950 को गणतंत्र दिवस का पहला उत्सव भारत के लिए एक विशेष दिन था, जिसने नागरिकों की लोकतांत्रिक साझेदारी और संविधान के प्रति उनकी वचनबद्धता को दर्शाया। यह दिन हर साल राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिसमें सभी भारतीय एकता और विविधता की भावना से जुड़ते हैं。
गणतन्त्र दिवस भारत गणराज्य का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इस वर्ष 2026 में भारत का 77वाँ गणतन्त्र दिवस मनाया जा रहा है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष श्री एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन गणतंत्र दिवस परेड 2026 के मुख्य अतिथि होंगे।
एक स्वतन्त्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज्य स्थापित करने के लिए 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इसे लागू करने के 26 जनवरी की तिथि को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था।
इस दिन हर भारतीय अपने देश के लिए प्राण देने वाले अमर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति राष्ट्र के नाम संदेश देते हैं। स्कूलों, कॉलेजों आदि मे कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भारत गणराज्य के राष्ट्रपति दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भारतीय ध्वज फहराते हैं। राजधानी दिल्ली में बहुत सारे आकर्षक और मनमोहक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। दिल्ली को अच्छी तरह सजाया जाता है कर्त्तव्यपथ पर बड़ी धूम-धाम से परेड निकलती है जिसमें विभिन्न प्रदेशों और सरकारी विभागों की झांकियाँ होतीं हैं। देश के कोने कोने से लोग दिल्ली मे 26 जनवरी की परेड देखने आते हैं। भारतीय सेना अस्त्र-शस्त्रों का प्रदर्शन होता है। 26 जनवरी के दिन धूम-धाम से राष्ट्रपति की सवारी निकाली जाती है तथा बहुत से मनमोहक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
देश के हर कोने मे जगह जगह ध्वजवन्दन होता है और कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विश्व भर में फैले हुए भारतीय मूल के लोग तथा भारत के दूतावास भी गणतंत्र दिवस को हर्षोल्लास के साथ मनातें हैं। भारत के हर कोने कोने में मनाया जाता है , और देश के प्रति एक नई उमंग देखने को मिलती है ।
३१ दिसम्बर सन् 1929 के दिसंबर में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ जिसमें भारत को ब्रिटिश साम्राज्य के अन्तर्गत डोमिनियन स्टेट बनाने के विचार का विरोध करते हुए भारत को 'पूर्ण स्वराज्य' देने की मांग की गयी। इसी के साथ २६ जनवरी १९३० को भारत का स्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद प्रतिवर्ष २६ जनवरी को द्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। १५ अगस्त 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। २६ जनवरी के इस ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसी दिन को भारत का नव निर्मित संविधान लागू करने का निर्णय लिया गया
भारत के स्वतंत्र हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1946 से आरंभ कर दिया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। डॉ० भीमराव अम्बेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। संविधान निर्माण में कुल 22 समितीयाँ थी जिसमें प्रारूप समिति (ड्राफ्टींग कमेटी) सबसे प्रमुख एवं महत्त्वपूर्ण समिति थी और इस समिति का कार्य संपूर्ण ‘संविधान लिखना’ या ‘निर्माण करना’ था। प्रारूप समिति के अध्यक्ष विधिवेत्ता डॉ० भीमराव आंबेडकर थे। प्रारूप समिति ने और उसमें विशेष रूप से डॉ. आंबेडकर जी ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन में भारतीय संविधान का निर्माण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान सुपूर्द किया, इसलिए 26 नवंबर दिवस को भारत में संविधान दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है। संविधान सभा ने संविधान निर्माण के समय कुल 114 दिन बैठक की। इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी। अनेक सुधारों और बदलावों के बाद सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित कॉपियों पर हस्ताक्षर किये। इसके दो दिन बाद संविधान 26 जनवरी को यह देश भर में लागू हो गया। 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए इसी दिन संविधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई।
भारत ने 26 जनवरी, 1950 को पहला गणतंत्र दिवस मनाया दिन भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था। इस दिन भारतीय संविधान लागू हुआ, जिससे भारत एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
गणतंत्र दिवस का पहला समारोह नई दिल्ली के राजपथ पर मनाया गया, जहाँ देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ध्वजारोहण किया। उन्होंने 21 तोपों की सलामी के साथ भारतीय राष्ट्रध्वज फहराया, जो एक ऐतिहासिक क्षण था।
सेना की परेड आयोजित की गई, जिसमें भारतीय सैन्य बलों की शक्ति और विविधता का प्रदर्शन किया गया। गणतंत्र दिवस परेड न केवल एक सैन्य शो था, बल्कि यह देश की सांस्कृति विविधता और औपनिवेशिक शासन से मुक्ति के प्रतीक के रूप में भी प्रकट हुआ।
गणतंत्र दिवस का यह अवसर केवल एक राष्ट्रीय उत्सव नहीं था, बल्कि यह एक ऐसा दिन था जब लोगों ने अपने अधिकारों और विधियों को स्वीकार किया, जिसने उन्हें अपने देश की राजनीति में भाग लेने का अधिकार दिया। यह दिन संविधान के महत्व को भी उजागर करता है, जो भारतीय नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे का अधिकार प्रदान करता है।
26 जनवरी, 1950 को गणतंत्र दिवस का पहला उत्सव भारत के लिए एक विशेष दिन था, जिसने नागरिकों की लोकतांत्रिक साझेदारी और संविधान के प्रति उनकी वचनबद्धता को दर्शाया। यह दिन हर साल राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिसमें सभी भारतीय एकता और विविधता की भावना से जुड़ते हैं。
गणतन्त्र दिवस भारत गणराज्य का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इस वर्ष 2026 में भारत का 77वाँ गणतन्त्र दिवस मनाया जा रहा है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष श्री एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन गणतंत्र दिवस परेड 2026 के मुख्य अतिथि होंगे।
एक स्वतन्त्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज्य स्थापित करने के लिए 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इसे लागू करने के 26 जनवरी की तिथि को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था।
इस दिन हर भारतीय अपने देश के लिए प्राण देने वाले अमर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति राष्ट्र के नाम संदेश देते हैं। स्कूलों, कॉलेजों आदि मे कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भारत गणराज्य के राष्ट्रपति दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भारतीय ध्वज फहराते हैं। राजधानी दिल्ली में बहुत सारे आकर्षक और मनमोहक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। दिल्ली को अच्छी तरह सजाया जाता है कर्त्तव्यपथ पर बड़ी धूम-धाम से परेड निकलती है जिसमें विभिन्न प्रदेशों और सरकारी विभागों की झांकियाँ होतीं हैं। देश के कोने कोने से लोग दिल्ली मे 26 जनवरी की परेड देखने आते हैं। भारतीय सेना अस्त्र-शस्त्रों का प्रदर्शन होता है। 26 जनवरी के दिन धूम-धाम से राष्ट्रपति की सवारी निकाली जाती है तथा बहुत से मनमोहक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
देश के हर कोने मे जगह जगह ध्वजवन्दन होता है और कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विश्व भर में फैले हुए भारतीय मूल के लोग तथा भारत के दूतावास भी गणतंत्र दिवस को हर्षोल्लास के साथ मनातें हैं। भारत के हर कोने कोने में मनाया जाता है , और देश के प्रति एक नई उमंग देखने को मिलती है ।
३१ दिसम्बर सन् 1929 के दिसंबर में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ जिसमें भारत को ब्रिटिश साम्राज्य के अन्तर्गत डोमिनियन स्टेट बनाने के विचार का विरोध करते हुए भारत को 'पूर्ण स्वराज्य' देने की मांग की गयी। इसी के साथ २६ जनवरी १९३० को भारत का स्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद प्रतिवर्ष २६ जनवरी को द्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। १५ अगस्त 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। २६ जनवरी के इस ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसी दिन को भारत का नव निर्मित संविधान लागू करने का निर्णय लिया गया
भारत के स्वतंत्र हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1946 से आरंभ कर दिया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। डॉ० भीमराव अम्बेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। संविधान निर्माण में कुल 22 समितीयाँ थी जिसमें प्रारूप समिति (ड्राफ्टींग कमेटी) सबसे प्रमुख एवं महत्त्वपूर्ण समिति थी और इस समिति का कार्य संपूर्ण ‘संविधान लिखना’ या ‘निर्माण करना’ था। प्रारूप समिति के अध्यक्ष विधिवेत्ता डॉ० भीमराव आंबेडकर थे। प्रारूप समिति ने और उसमें विशेष रूप से डॉ. आंबेडकर जी ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन में भारतीय संविधान का निर्माण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान सुपूर्द किया, इसलिए 26 नवंबर दिवस को भारत में संविधान दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है। संविधान सभा ने संविधान निर्माण के समय कुल 114 दिन बैठक की। इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी। अनेक सुधारों और बदलावों के बाद सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित कॉपियों पर हस्ताक्षर किये। इसके दो दिन बाद संविधान 26 जनवरी को यह देश भर में लागू हो गया। 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए इसी दिन संविधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई।


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