शिरीष कुमार मेहरोत्रा शुरुआती रुझानों से ही सबसे आगे
गोरखपुर क्षेत्र के अजय शंकर श्रीवास्तव तीसरे स्थान पर
हरजीत अरोरा चौथे स्थान पर
लखनऊ के प्रशांत सिंह अटल पांचवें स्थान
अंतिम रूप से 25 विजयी सदस्यों की आधिकारिक सूची जारी की जाएगी
अंतिम रूप से 25 विजयी सदस्यों की आधिकारिक सूची जारी की जाएगी
कुल 25 सदस्यों के लिए 333 प्रत्याशी चुनाव में भाग ले रहे हैं।
कानपुर: 29 मई 2026
प्रयागराज: 29 मई 2026
उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव की गणना की वर्तमान स्थिति को लेकर कई महत्वपूर्ण अपडेट सामने आए हैं। 22 अप्रैल 2026 को हुए चुनाव में, अब तक 75 जिलों में से केवल 19 जिलों की प्रथम वरीयता मतों की गणना पूरी हुई है.गणना गतिमान है। चूँकि इस चुनाव में 'एकल हस्तांतरणीय मत पद्धति' के तहत वरीयता क्रम के आधार पर विजेता तय होते हैं, इसलिए इसकी गणना प्रक्रिया काफी लंबी चलती है।
शिवकिशोर गौर को 2626 मत मिले हैं और वे वर्तमान में सबसे आगे हैं। गोरखपुर क्षेत्र के बाद, अजय शंकर श्रीवास्तव 1643 मतों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। चौथे स्थान पर 1608 मतों के साथ हरजीत अरोरा हैं, जबकि लखनऊ के प्रशांत सिंह अटल 1460 मतों के साथ पांचवें स्थान पर स्थित हैं।
उत्तर प्रदेश बार काउंसिल चुनाव 2025-26 की मतगणना में कानपुर के प्रत्याशी और वर्तमान उपाध्यक्ष अनुराग पांडेय लगातार मजबूत स्थिति में बने हुए हैं। वे प्रथम वरीयता (First Preference) के मतों की गिनती में प्रदेश के टॉप-10 प्रत्याशियों की सूची में शामिल हैं
मई 2026 के नवीनतम रुझानों के अनुसार अनुराग पांडेय की स्थिति इस प्रकार है: मतगणना में वर्तमान स्थिति वरीयता क्रम में बढ़त: प्रथम वरीयता के मतों के आधार पर तैयार की जा रही मेरिट लिस्ट में अनुराग पांडेय शीर्ष उम्मीदवारों की रेस में बने हुए हैं, जिससे उनकी जीत की प्रबल संभावना जताई जा रही है चुनाव चिन्ह/बैलट संख्या: इस बार काउंसिल चुनाव में अनुराग पांडेय बैलट पेपर के क्रम संख्या-54 पर प्रत्याशी हैं क्षेत्रीय पकड़: कानपुर और आस-पास के जनपदों (जिलों) की मतपेटियाँ खुलने के बाद उनके मतों की संख्या में भारी उछाल आया है, क्योंकि वे कानपुर और आसपास के अधिवक्ताओं के बीच काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। अनुराग पांडेय का प्रोफाइल और पृष्ठभूमि वर्तमान पद: वे उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के वर्तमान उपाध्यक्ष (Vice-Chairman) के रूप में कार्यरत हैं पिछला कार्यकाल: साल 2021 में पूर्व अध्यक्ष बी.के. श्रीवास्तव के निधन के बाद खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में अनुराग पांडेय ने अपने प्रतिद्वंद्वी को हराकर पहली बार बार काउंसिल में जगह बनाई थी मुख्य वक्ता: वे अधिवक्ताओं के हितों, बीमा योजनाओं और बार-बेंच के संबंधों को लेकर लगातार मुखर रहने वाले नेताओं में गिने जाते हैं चूंकि बार काउंसिल की मतगणना 'एकल हस्तांतरणीय मत पद्धति' (Single Transferable Vote) पर आधारित है, इसलिए सभी 75 जिलों की प्रथम और द्वितीय वरीयता के मतों की पूर्ण छंटनी के बाद ही उनके आधिकारिक रूप से पुनः निर्वाचित होने की अंतिम घोषणा की जाएगी उत्तर प्रदेश बार काउंसिल।
मतगणना अभी भी जारी है, और यह संभावना है कि शीर्ष दस प्रत्याशियों की स्थिति में बदलाव हो सकता है क्योंकि अधिक जिलों की गणना की जानी है।
मतगणना की वर्तमान स्थिति (मई 2026 अपडेट) मतगणना के दिन: ताजा अपडेट के अनुसार, मतगणना को निरंतर जारी रहते हुए 42 दिन से अधिक का समय हो चुका है。 जिलों की स्थिति: शुरुआती दौर में जहाँ 19 से 20 जिलों की गिनती पूरी हुई थी, वहीं अब तक 32 से अधिक जनपदों (जिलों) के मतों की गणना प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। शिरीष कुमार मेहरोत्रा (लगातार शुरुआती रुझानों से ही सबसे आगे बढ़त बनाए हुए हैं)।
अजय शंकर श्रीवास्तव (32 जिलों की गणना के बाद मजबूत स्थिति में)।
शिवकिशोर गौर को 2626 मत मिले हैं और वे वर्तमान में सबसे आगे हैं। गोरखपुर क्षेत्र के बाद, अजय शंकर श्रीवास्तव 1643 मतों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। चौथे स्थान पर 1608 मतों के साथ हरजीत अरोरा हैं, जबकि लखनऊ के प्रशांत सिंह अटल 1460 मतों के साथ पांचवें स्थान पर स्थित हैं।
उत्तर प्रदेश बार काउंसिल चुनाव 2025-26 की मतगणना में कानपुर के प्रत्याशी और वर्तमान उपाध्यक्ष अनुराग पांडेय लगातार मजबूत स्थिति में बने हुए हैं। वे प्रथम वरीयता (First Preference) के मतों की गिनती में प्रदेश के टॉप-10 प्रत्याशियों की सूची में शामिल हैं
मई 2026 के नवीनतम रुझानों के अनुसार अनुराग पांडेय की स्थिति इस प्रकार है: मतगणना में वर्तमान स्थिति वरीयता क्रम में बढ़त: प्रथम वरीयता के मतों के आधार पर तैयार की जा रही मेरिट लिस्ट में अनुराग पांडेय शीर्ष उम्मीदवारों की रेस में बने हुए हैं, जिससे उनकी जीत की प्रबल संभावना जताई जा रही है चुनाव चिन्ह/बैलट संख्या: इस बार काउंसिल चुनाव में अनुराग पांडेय बैलट पेपर के क्रम संख्या-54 पर प्रत्याशी हैं क्षेत्रीय पकड़: कानपुर और आस-पास के जनपदों (जिलों) की मतपेटियाँ खुलने के बाद उनके मतों की संख्या में भारी उछाल आया है, क्योंकि वे कानपुर और आसपास के अधिवक्ताओं के बीच काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। अनुराग पांडेय का प्रोफाइल और पृष्ठभूमि वर्तमान पद: वे उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के वर्तमान उपाध्यक्ष (Vice-Chairman) के रूप में कार्यरत हैं पिछला कार्यकाल: साल 2021 में पूर्व अध्यक्ष बी.के. श्रीवास्तव के निधन के बाद खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में अनुराग पांडेय ने अपने प्रतिद्वंद्वी को हराकर पहली बार बार काउंसिल में जगह बनाई थी मुख्य वक्ता: वे अधिवक्ताओं के हितों, बीमा योजनाओं और बार-बेंच के संबंधों को लेकर लगातार मुखर रहने वाले नेताओं में गिने जाते हैं चूंकि बार काउंसिल की मतगणना 'एकल हस्तांतरणीय मत पद्धति' (Single Transferable Vote) पर आधारित है, इसलिए सभी 75 जिलों की प्रथम और द्वितीय वरीयता के मतों की पूर्ण छंटनी के बाद ही उनके आधिकारिक रूप से पुनः निर्वाचित होने की अंतिम घोषणा की जाएगी उत्तर प्रदेश बार काउंसिल।
मतगणना अभी भी जारी है, और यह संभावना है कि शीर्ष दस प्रत्याशियों की स्थिति में बदलाव हो सकता है क्योंकि अधिक जिलों की गणना की जानी है।
मतगणना की वर्तमान स्थिति (मई 2026 अपडेट) मतगणना के दिन: ताजा अपडेट के अनुसार, मतगणना को निरंतर जारी रहते हुए 42 दिन से अधिक का समय हो चुका है。 जिलों की स्थिति: शुरुआती दौर में जहाँ 19 से 20 जिलों की गिनती पूरी हुई थी, वहीं अब तक 32 से अधिक जनपदों (जिलों) के मतों की गणना प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। शिरीष कुमार मेहरोत्रा (लगातार शुरुआती रुझानों से ही सबसे आगे बढ़त बनाए हुए हैं)।
अजय शंकर श्रीवास्तव (32 जिलों की गणना के बाद मजबूत स्थिति में)।
चुनाव और परिणाम की प्रक्रिया यह चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराया गया था, जिसमें प्रदेश भर के 1 लाख से अधिक अधिवक्ताओं ने मतदान किया है। सभी 75 जिलों की प्रथम वरीयता और उसके बाद द्वितीय व तृतीय वरीयता के मतों के स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही, अंतिम रूप से 25 विजयी सदस्यों की आधिकारिक सूची जारी की जाएगी
इसकी विस्तृत स्थिति और परिणामों के लिए बार काउंसिल की आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय समाचार स्रोतों की निगरानी करने की अनुशंसा की जाती है।
इसकी विस्तृत स्थिति और परिणामों के लिए बार काउंसिल की आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय समाचार स्रोतों की निगरानी करने की अनुशंसा की जाती है।




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