देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष
आराधना मिश्रा 'मोना' को कमान सौंपकर प्रभावी ब्राह्मण मतदाताओं को साधने और पार्टी से जोड़ने का संदेश
इमरान मसूद के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के कैडर प्रभाव को पुनर्जीवित करने की रणनीति
लखनऊ:02 अक्टूबर 2026
कांग्रेस ने 2 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन में एक बड़ा फेरबदल करते हुए अजय राय की जगह आराधना मिश्रा 'मोना' को नया प्रदेश अध्यक्ष (PCC Chief) और सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके साथ ही देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है।
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस की इस 'मिश्रा + मसूद' की नई टीम के गठन के पीछे निम्नलिखित गहरे राजनीतिक मायने और महत्व हैं:
1. पुराना सामाजिक समीकरण (ब्राह्मण + मुस्लिम + दलित + EBC Coalition)
कांग्रेस ने इस बदलाव के जरिए उत्तर प्रदेश में अपने उस पारंपरिक सामाजिक समीकरण को पुनर्जीवित करने की कोशिश की है जो दशकों पहले उसकी ताकत हुआ करता था: ब्राह्मण आउटरीच: आराधना मिश्रा 'मोना' (वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी की बेटी) को कमान सौंपकर पार्टी ने राज्य के प्रभावी ब्राह्मण मतदाताओं को साधने और उन्हें पार्टी से जोड़ने का बड़ा संदेश दिया है।
अल्पसंख्यक (मुस्लिम) लामबंदी: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मजबूत जनाधार रखने वाले मुस्लिम चेहरे इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर अल्पसंख्यक समुदाय में पैठ मजबूत करने की कोशिश की गई है।
दलित और अति-पिछड़ा (EBC) प्रतिनिधित्व: आलोक प्रसाद (दलित चेहरा) और देवेंद्र निषाद (अति-पिछड़ा वर्ग) को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने एक संतुलित सामाजिक गठबंधन (Social Coalition) बनाने का दांव चला है।
2. क्षेत्रीय संतुलन
नई टीम के माध्यम से कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के दो अलग-अलग कोनों को संतुलित किया है:
आराधना मिश्रा के जरिए पार्टी का ध्यान पूर्वांचल और मध्य यूपी पर केंद्रित रहेगा, जहाँ उनका पारंपरिक प्रभाव है।
इमरान मसूद के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के कैडर और प्रभाव को पुनर्जीवित करने की रणनीति है।
3. समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन में मोलभाव
2027 के विधानसभा चुनाव के लिए विपक्षी 'INDIA' गठबंधन के तहत सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच खींचतान चल रही है। अजय राय पर सपा के साथ तालमेल बिठाने में नाकाम रहने के कयास लग रहे थे।
इमरान मसूद लगातार अखिलेश यादव की सपा पर आक्रामक रुख अपनाए हुए थे कि कांग्रेस को कमजोर न समझा जाए।
नई टीम, विशेष रूप से आराधना मिश्रा (जिन्होंने पहले अखिलेश यादव के साथ बातचीत की शुरुआत की थी), अब सपा के सामने अधिक मजबूती और रणनीतिक तरीके से सीटों के बंटवारे (Seat-Sharing) पर मोलभाव कर सकेगी।
4. महिला नेतृत्व और विधायी अनुभव
आराधना मिश्रा लंबे समय से उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता रही हैं और उन्हें जमीनी स्तर पर काम करने का गहरा विधायी अनुभव है। उन्हें अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने राज्य में महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने का एक सकारात्मक राजनीतिक संदेश भी दिया है।
कांग्रेस के लिए 2027 का चुनाव अपने वजूद को वापस पाने की लड़ाई है। इस नई टीम का मुख्य राजनीतिक महत्व यही है कि यह बिखरे हुए कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूंकेगी, गठबंधन की मेज पर कांग्रेस की स्थिति मजबूत करेगी और पार्टी के पारंपरिक कोर वोट बैंक (ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित) को दोबारा कांग्रेस के पाले में लाने का प्रयास करेगी।




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