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आदरणीय लालकृष्ण आडवाणी जी के शताब्दी वर्ष में प्रवेश पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ

उप-प्रधानमंत्री के रूप में  केंद्र सरकार  संचालन और नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान 
प्रशासनिक अनुभव, राजनीतिक परिपक्वता और निर्णय लेने की क्षमता महत्वपूर्ण रही
राम मंदिर निर्माण  यात्रा के संदर्भ में आडवाणी जी का नाम स्मरण किया जाता रहेगा।

कानपुर:8 नवम्बर 2026
नई दिल्ली, 8 नवंबर 2026
राष्ट्रसेवा, संगठन निर्माण, वैचारिक प्रतिबद्धता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण का एक प्रेरणादायी अध्याय हैं आडवाणी जीभारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनका योगदान केवल उनके राजनीतिक पदों, उपलब्धियों अथवा सत्ता में बिताए गए वर्षों से नहीं आंका जा सकता, बल्कि उनका जीवन राष्ट्र के वैचारिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक विकास की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है। आदरणीय श्री लालकृष्ण आडवाणी जी ऐसे ही महान व्यक्तित्वों में शामिल हैं। उनका जीवन संघर्ष, त्याग, अनुशासन, राष्ट्रनिष्ठा, संगठनात्मक क्षमता और सार्वजनिक जीवन में निरंतर सक्रियता की एक लंबी प्रेरणादायी यात्रा रहा है।
आज उनके जीवन के शताब्दी वर्ष में प्रवेश का अवसर हम सभी के लिए विशेष महत्व रखता है। यह केवल एक वरिष्ठ राजनेता के दीर्घ जीवन का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के उस दौर का स्मरण भी है, जिसमें अनेक चुनौतियों और परिस्थितियों के बीच उन्होंने अपने विचारों, सिद्धांतों और संगठनात्मक क्षमता के माध्यम से देश की राजनीति को एक नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विभाजन की पीड़ा से राष्ट्रसेवा के संकल्प तक
लालकृष्ण आडवाणी जी का जन्म 8 नवंबर 1927 को तत्कालीन अविभाजित भारत के सिंध प्रांत के कराची में हुआ था। भारत विभाजन की त्रासदी ने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया। विभाजन के कारण उन्हें अपना जन्मस्थान छोड़कर भारत आना पड़ा। यह अनुभव उनके जीवन का एक ऐसा महत्वपूर्ण मोड़ बना, जिसने उनके भीतर राष्ट्र, संस्कृति, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय पहचान के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक और प्रचारक के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। संगठनात्मक अनुशासन, राष्ट्र के प्रति समर्पण और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच कार्य करने की भावना उनके व्यक्तित्व के अभिन्न अंग बन गए। प्रारंभिक वर्षों में उन्होंने जिस निष्ठा और परिश्रम के साथ संगठनात्मक दायित्वों का निर्वहन किया, उसी ने आगे चलकर उन्हें भारतीय राजनीति के प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं में स्थापित किया।
भारतीय जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी के निर्माण तक ऐतिहासिक भूमिका
भारतीय जनसंघ के साथ जुड़कर आडवाणी जी ने संगठन के विस्तार और वैचारिक आधार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने ऐसे समय में राजनीतिक और संगठनात्मक कार्य किया, जब राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस का व्यापक प्रभाव था और वैकल्पिक राजनीतिक विचारधारा को स्थापित करना एक बड़ी चुनौती थी।
भारतीय जनसंघ के संगठनात्मक विकास से लेकर जनता पार्टी के दौर और फिर वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना तक उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। अटल बिहारी वाजपेयी जी के साथ उनकी राजनीतिक और संगठनात्मक साझेदारी भारतीय राजनीति के इतिहास में विशेष स्थान रखती है।
भाजपा के प्रारंभिक दौर में पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना आसान नहीं था। सीमित संसाधनों, राजनीतिक चुनौतियों और संगठनात्मक कठिनाइयों के बावजूद आडवाणी जी ने देशव्यापी जनसंपर्क, कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और संगठन के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया।
उनकी संगठनात्मक क्षमता, स्पष्ट वैचारिक दृष्टिकोण और राजनीतिक परिस्थितियों का आकलन करने की योग्यता ने भाजपा को एक प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास पैदा किया और संगठन को देश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए।
अयोध्या आंदोलन और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति
भारतीय राजनीति में लालकृष्ण आडवाणी जी की पहचान का एक महत्वपूर्ण अध्याय अयोध्या आंदोलन से जुड़ा हुआ है। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान उनकी सोमनाथ से अयोध्या तक निकाली गई रथयात्रा ने देशव्यापी राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को प्रभावित किया।
इस यात्रा के माध्यम से उन्होंने भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस आंदोलन के समर्थन और विरोध में देशभर में व्यापक बहस हुई तथा भारतीय राजनीति पर इसके दूरगामी प्रभाव पड़े।
अयोध्या आंदोलन भारतीय राजनीतिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में दर्ज है। इसके विभिन्न पक्षों और परिणामों पर अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं, लेकिन यह निर्विवाद है कि इस आंदोलन ने देश की राजनीति, सामाजिक विमर्श और चुनावी परिदृश्य को गहराई से प्रभावित किया।
राम मंदिर निर्माण की दिशा में आगे बढ़ी ऐतिहासिक यात्रा के संदर्भ में भी आडवाणी जी का नाम विशेष रूप से स्मरण किया जाता रहेगा।
गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री के रूप में महत्वपूर्ण योगदान
आडवाणी जी ने केंद्र सरकार में गृह मंत्री तथा बाद में उप-प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक दायित्वों का निर्वहन किया। गृह मंत्री के रूप में उनके सामने देश की आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद, सीमा पार से होने वाली चुनौतियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े अनेक गंभीर प्रश्न थे।
उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, आतंकवाद के विरुद्ध प्रभावी नीतियां बनाने और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके कार्यकाल में आंतरिक सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण नीतिगत पहल हुईं। आतंकवाद और संगठित अपराध जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए संस्थागत स्तर पर प्रयास किए गए।
उप-प्रधानमंत्री के रूप में भी उन्होंने केंद्र सरकार के संचालन और राष्ट्रीय नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका प्रशासनिक अनुभव, राजनीतिक परिपक्वता और निर्णय लेने की क्षमता सरकार के लिए महत्वपूर्ण रही।
नए राज्यों के गठन और संघीय व्यवस्था में योगदान
भारत की संघीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को संवैधानिक स्वरूप देने के संदर्भ में वर्ष 2000 में झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड जैसे नए राज्यों का गठन एक ऐतिहासिक कदम था।
इन राज्यों के गठन की प्रक्रिया में तत्कालीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आडवाणी जी ने उस समय सरकार के वरिष्ठ नेतृत्वकर्ता के रूप में इन राजनीतिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इन नए राज्यों के गठन से संबंधित क्षेत्रीय पहचान, प्रशासनिक सुविधा और विकास की आकांक्षाओं को नई दिशा मिली। यह भारतीय लोकतंत्र की उस विशेषता का उदाहरण भी है, जिसमें संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से क्षेत्रीय मांगों को स्वीकार करते हुए शासन व्यवस्था में परिवर्तन किया जा सकता है।
आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा
लालकृष्ण आडवाणी जी के सार्वजनिक जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष आपातकाल के दौरान उनका संघर्ष रहा है।
वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में आपातकाल लागू किए जाने के बाद नागरिक स्वतंत्रताओं, राजनीतिक गतिविधियों और प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रतिबंध लगाए गए थे। विपक्ष के अनेक नेताओं को गिरफ्तार किया गया और लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने अभूतपूर्व चुनौतियां खड़ी हुईं।
इस कठिन दौर में आडवाणी जी ने लोकतंत्र की बहाली के संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने राजनीतिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया तथा आपातकाल के विरोध में अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।
आपातकाल का वह दौर भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण सबक के रूप में याद किया जाता है। आडवाणी जी सहित अनेक नेताओं के संघर्ष ने लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के आंदोलन को मजबूती प्रदान की।
संसदीय राजनीति और सार्वजनिक जीवन में दीर्घ अनुभव
आडवाणी जी का राजनीतिक जीवन केवल संगठन निर्माण और जन आंदोलनों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने संसदीय राजनीति में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। संसद में उनके वक्तव्यों, राजनीतिक दृष्टिकोण और संवैधानिक विषयों पर उनकी समझ ने उन्हें एक अनुभवी संसदीय नेता के रूप में प्रतिष्ठित किया।
उन्होंने विपक्ष के नेता के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संसदीय विमर्श, नीतिगत बहस तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के महत्व को उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव से रेखांकित किया।
वर्ष 2015 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। वर्ष 2024 में भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा की। यह सम्मान उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र के प्रति योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर की गई स्वीकृति का प्रतीक है।
व्यक्तिगत अनुभव : स्नेह, आत्मीयता और आशीर्वाद की अविस्मरणीय स्मृति
आदरणीय आडवाणी जी के व्यक्तित्व का एक अत्यंत प्रभावशाली पक्ष उनकी विनम्रता, आत्मीयता और लोगों से जुड़ने की सहज भावना है। मेरे लिए यह अत्यंत गौरव और सौभाग्य का विषय है कि मुझे समय-समय पर उनका स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिला है।
हाल ही में उनके जन्मदिवस के अवसर पर उनसे भेंट कर शुभकामनाएं देने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। यह मेरे लिए केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि जीवन की उन अविस्मरणीय स्मृतियों में से एक है, जिन्हें व्यक्ति लंबे समय तक अपने हृदय में संजोकर रखता है।
इस अवसर पर मैंने उनसे आत्मीयता के साथ अपना परिचय देते हुए कहा—
"आदरणीय आडवाणी जी, मैं डॉ. लोकेश शुक्ला, कानपुर से हूं। राम मंदिर निर्माण के विषय में राजकीय केंद्रीय वस्त्र संस्थान में आपसे भेंट हुई थी।"
मेरी बात सुनते ही उनके चेहरे पर एक सौम्य और आत्मीय मुस्कान बिखर गई। वह क्षण मेरे लिए अत्यंत अविस्मरणीय, भावुक और प्रेरणादायक था। उनके स्नेहपूर्ण व्यवहार और अपनत्व ने मेरे मन को गहराई से स्पर्श किया।
जीवन के इस पड़ाव पर भी उनकी विनम्रता, सहजता और लोगों के प्रति आत्मीय जुड़ाव अद्भुत है। वर्षों पुरानी मुलाकातों को स्मरण रखने की उनकी क्षमता उनके असाधारण व्यक्तित्व का परिचय देती है। वास्तव में किसी महान जननेता की पहचान केवल उसके पद, प्रतिष्ठा और उपलब्धियों से नहीं होती, बल्कि उसके मानवीय मूल्यों, संवेदनशीलता और लोगों के प्रति सम्मानपूर्ण व्यवहार से भी होती है।
आदरणीय आडवाणी जी का स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद मेरे लिए अमूल्य धरोहर है। उनके साथ हुई यह आत्मीय भेंट मेरे जीवन की स्मरणीय घटनाओं में सदैव शामिल रहेगी और राष्ट्रसेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा जनकल्याण के कार्यों के प्रति मेरी प्रतिबद्धता को निरंतर नई ऊर्जा प्रदान करती रहेगी।
आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत
आडवाणी जी का जीवन अनेक महत्वपूर्ण संदेश देता है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में संगठन के प्रति निष्ठा, विचारों के प्रति प्रतिबद्धता, अनुशासन, धैर्य और निरंतर परिश्रम को विशेष महत्व दिया।
उनकी राजनीतिक यात्रा यह सिखाती है कि किसी भी बड़े संगठन का निर्माण केवल सत्ता प्राप्त करने के उद्देश्य से नहीं होता, बल्कि उसके लिए वर्षों तक निरंतर कार्य, समर्पित कार्यकर्ताओं का निर्माण और समाज के साथ संवाद आवश्यक होता है।
उनका जीवन यह भी बताता है कि सार्वजनिक जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन अपने विचारों और दायित्वों के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध रहना ही किसी व्यक्ति को दीर्घकालिक पहचान प्रदान करता है।
भारतीय राजनीति के इतिहास का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए आडवाणी जी का जीवन एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय रहेगा।
राष्ट्र के प्रति समर्पित जीवन को शत-शत नमन
आज जब आदरणीय लालकृष्ण आडवाणी जी अपने जीवन के शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, तब उनके लंबे सार्वजनिक जीवन, संगठनात्मक योगदान, राजनीतिक संघर्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पण का स्मरण करना हम सभी के लिए गौरव का विषय है।
उनकी जीवन यात्रा भारतीय लोकतंत्र के अनेक महत्वपूर्ण पड़ावों की साक्षी रही है। उन्होंने विभाजन की त्रासदी देखी, स्वतंत्र भारत के निर्माण की प्रक्रिया को अनुभव किया, आपातकाल का संघर्ष देखा, राजनीतिक संगठनों का निर्माण किया और देश की सत्ता व्यवस्था में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
उनका व्यक्तित्व और सार्वजनिक जीवन भारतीय राजनीति की एक महत्वपूर्ण विरासत है। उनके अनुभव, विचार और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करते रहेंगे।
आदरणीय श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को जीवन के शताब्दी वर्ष में प्रवेश की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं।
ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति, दीर्घायु और निरंतर प्रसन्नता प्रदान करें। उनका स्नेह और आशीर्वाद हम सभी को मिलता रहे तथा उनका प्रेरणादायी जीवन आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहे।
राष्ट्रसेवा के इस दीर्घ एवं प्रेरणादायी जीवन को शत-शत नमन!
सादर प्रणाम एवं शुभकामनाएं। 🙏🌹
— डॉ. लोकेश शुक्ला, कानपुर





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