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ऋषभ शुक्ला : हथियारों के संचालन में पूरी तरह माहिर था: ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से अवैध तरीके से असलहे चुराकर बेचने के आरोप में निकाला गया था

इंस्टाग्राम अकाउंट पर 34.5 हजार (34,500) फॉलोअर्स हैं, खुद 69 लोगों को फॉलो करता था
शूटिंग में गोल्ड मेडल जीत चुका है और उसे हथियार चलाने की विशेष ट्रेनिंग भी मिली हुई थी
आरोपी के घर से भारी मात्रा में कारतूस, अवैध असलहे और मादक पदार्थ (नशीले पदार्थ) बरामद
कानपुर: 30 अक्टूबर 2026
लखनऊ: 30 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सआदतगंज इलाके में सोमवार को मामूली विवाद ने ऐसा हिंसक रूप ले लिया कि एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई। नौबस्ता के ब्राह्मणी टोला में चबूतरे और गाड़ी खड़ी करने को लेकर शुरू हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। आरोप है कि मर्चेंट नेवी में नेविगेशन ऑफिसर के रूप में काम कर चुके ऋषभ शुक्ला ने पिस्टल से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस घटना में रिटायर्ड सचिवालय कर्मचारी शिवाजी तिवारी, उनके भाई शंभू तिवारी और शिवाजी के बेटे सुयश तिवारी की मौत हो गई। वारदात के बाद इलाके में तनाव का माहौल है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
है।
सोशल मीडिया पोस्ट से:
Farmer Sugar Cane ·
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एक दिन पहले1 दिन ·
एक ही घर से एक साथ 3 अर्थियाँ निकलीं—बाप, बेटा और भाई। जिस आंगन में कल तक जिंदगी खिलखिला रही थी, आज वहाँ सिर्फ चीखें, मातम और कभी न सूखने वाले आंसू हैं। पूरा भरा-पूरा परिवार एक झटके में उजड़ गया।
लखनऊ के सआदतगंज का वो मंज़र अगर किसी ने देखा या सुना होगा, तो उसकी रूह काँप गई होगी।
एक मामूली चबूतरा... थोड़ी सी गाड़ी खड़ी करने की जगह... और सालों से अंदर ही अंदर सुलगता झूठी 'मूंछ की लड़ाई' का अहंकार। बीते सोमवार को क्या हुआ?
कहासुनी हुई, खून खौला, दिमाग पर शैतान सवार हुआ और आरोपी ऋषभ शुक्ला ने ट्रिगर दबा दिया। एक... दो... तीन! चंद सेकंड में गोलियों की तड़तड़ाहट शांत हो गई, लेकिन पीछे छोड़ गई कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा।
लेकिन ज़रा रुकिए... क्या दूसरा पक्ष जीत गया?
यह वह सवाल है जो आज हर उस इंसान को खुद से पूछना चाहिए जो बात-बात पर कॉलर पकड़ने या हथियार चमकाने को 'मर्दानगी' समझता है।
शुक्ला परिवार में गोली से कोई नहीं मरा, लेकिन यकीन मानिए—जो ज़िंदगी अब वो जिएंगे, वो मौत से भी बदतर है!
मुख्य आरोपी ऋषभ सलाखों के पीछे है, अपनी जवानी जेल की सीलन भरी दीवारों में गिलाएगा।
घर की 2 महिलाओं समेत परिवार के 6 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें 65 साल से ऊपर के वो बुज़ुर्ग भी शामिल हैं, जिन्हें इस उम्र में पोते-पोतियों का सहारा होना चाहिए था, आज वो पुलिस की गाड़ियों में बैठ रहे हैं।
NSA जैसी सख्त धाराओं की तैयारी है।
LDA ने घर पर ताला जड़ दिया, प्रशासनिक गाड़ियाँ खड़ी कारें उठा ले गईं और बची-खुची 'रईसी' पर देर रात बुलडोज़र गरज गया।
जिस छत को बनाने में ज़िंदगी भर की कमाई और इज़्ज़त लग जाती है, वो चंद सेकंड के गुस्से में मलबे का ढेर बन गई। आज खानदान का नाम समाज में सिर्फ 'हत्यारे' के तौर पर लिया जा रहा है।
अगर उस वक़्त वो लड़का 10 सेकंड के लिए अपनी आँखें बंद कर लेता, अपने बूढ़े माँ-बाप का चेहरा याद कर लेता, या सिर्फ एक कदम पीछे खींच लेता... तो क्या बिगड़ जाता?
चबूतरा अपनी जगह रहता, ज़मीन अपनी जगह रहती... और दोनों परिवार आज अपने-अपने घरों में सुकून की रोटी खा रहे होते।
यह सिर्फ एक वारदात नहीं, हम सबके लिए आईना है:
पड़ोस में विवाद किसके नहीं होते? गाड़ी खड़ी करने, नाली या दीवार को लेकर तनातनी किसके यहाँ नहीं होती? लेकिन जो इंसान कानून और संयम को छोड़कर अपने गुस्से को सिर पर चढ़ा लेता है, वो सबसे पहले अपने ही परिवार की कब्र खोदता है।
हथियार रखना ताकत नहीं है, सही वक्त पर खुद को काबू में रखना असली ताकत है। अगर विवाद है, तो पुलिस है, अदालत है, मोहल्ले के ज़िम्मेदार लोग हैं। लेकिन जब आप खुद 'जज' बनने की कोशिश करते हैं, तो फैसला हमेशा बर्बादी ही लिखता है।
दोषियों को कानून के तहत ऐसी मिसाल बनने वाली सजा मिलनी चाहिए कि अगली बार कोई भी आवेश में आकर किसी की जान लेने से पहले सौ बार काँप उठे।
वक़्त रहते संभल जाइए। गुस्सा सिर्फ एक माचिस की तीली है, जो दूसरों को जलाने से पहले खुद अपनी ही हथेली को खाक कर देती है!Dainik Jagran ·लखनऊ। जिस परिवार को पूर्वजों ने घर में पनाह दी। बच्चे साथ पले-बढ़े और तीन पीढ़ियों तक सुख-दुख बांटे, उसी परिवार के हाथों एक दिन वंश उजड़ जाएगा, यह सपने में भी नहीं सोचा था। यह दर्द है नौबस्ता स्थित ब्राह्मणी टोला में तिहरे हत्याकांड के मृतकों के स्वजन का। उन्होंने कहा कि करीब 50 साल पहले उनके पूर्वजों ने आरोपित परिवार को कालोनी में न सिर्फ रहने की जगह दी, बल्कि करीब 10 साल तक बिना किराया लिए घर में रखा।दोनों परिवारों के बीच रिश्ता इतना गहरा था कि बच्चे एक-दूसरे के पिता को चाचा और मां को चाची कहते थे। दोनों परिवारों के बीच इतनी आत्मीयता थी कि एक-दूसरे के घर की रसोई तक आना-जाना था। बरगद के पेड़ के पास की चंद कदम जमीन पर कार खड़ी करने को लेकर रिश्तों में ऐसी दरार पड़ी कि छह महीने में सबकुछ बदल गया। तीन पीढ़ियों से चले आ रहे अपनेपन का अंत तिहरे हत्याकांड के साथ हुआ।
मृतक परिवार में तीन पुरुष शिवाजी तिवारी, उनके भाई शिवेंद्र तिवारी उर्फ शंभू और उनका बेटा सुयश तिवारी था। तीनों की हत्या हो गई। अब परिवार में सिर्फ शिवाजी तिवारी की पत्नी ऊषा तिवारी, शिवेंद्र तिवारी की पत्नी रुचि तिवारी और शिवेंद्र की बेटी सुमेधा ही बची है।
विधानसभा अतरौलिया 8 घंटे
#सआदतगंज_तिहरा_हत्याकांड : गोल्ड मेडलिस्ट शूटर निकला कातिल
🎈ऋषभ शुक्ला लखनऊ के नौबस्ता (ब्राह्मणी टोला) में हुए सनसनीखेज तिहरे हत्याकांड का चौंकाने वाला खुलासा
🔴 मुख्य आरोपी के बारे में सनसनीखेज खुलासे
. दोनों हाथों में हथियार लेकर शवों के पास बैठा रहा, लोग हैरत में▪️ हत्याकांड के बाद भी जरा भी नहीं डरा▪️ एक हाथ में पिस्टल और दूसरे में मैगजीन थामकर मृतकों के शव के पास बेखौफ बैठा रहा▪️ घायलों की मदद के लिए आने वाले हर शख्स को गोली मारने की धमकी देता रहा▪️ पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया▪️ एक ही परिवार के तीन लोगों - शिवाजी तिवारी, उनके भाई शंभू और बेटे सुयश को चंद मिनटों में मौत के घाट उतारा
🔴 LDA का शिकंजा: अवैध बाउंड्रीवाल ध्वस्त, नक्शे की जांच▪️ प्रशासन ने हत्यारों पर ताबड़तोड़ कानूनी शिकंजा कसना शुरू किया▪️
मंगलवार को LDA की टीम ने मुख्य आरोपी ऋषभ के घर पर बुलडोजर चलाकर सड़क की जमीन पर बनी अवैध बाउंड्रीवाल गिरा दी मकान का नक्शा पास है या नहीं, इसकी गहन जांच इसके बाद पूरे मकान को जमींदोज करने की बड़ी कार्रवाई हो सकती है
भारी मात्रा में कारतूस व मादक पदार्थ बरामद पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी के घर से भारी मात्रा में कारतूस, अवैध असलहे और मादक पदार्थ (नशीले पदार्थ) बरामद होने की बात सामने आ रही है पालतू कुत्तों को ले गया नगर निगम बताया जा रहा है कि ऋषभ शुक्ला बहुत ही ज्यादा डॉग लवर था घर पर कई देसी कुत्ते पले हुए थे अब घर पर कोई भी सदस्य नहीं है (छह लोग जेल में हैं व दो लोग फरार हैं) जिसके कारण इन कुत्तों को नगर निगम की टीम अपने साथ ले गई।
🔴 कुख्यात परिवार की कुंडली▪️ इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने वाले परिवार की पृष्ठभूमि भी बेहद आपराधिक और विवादित रही है▪️ मुख्य आरोपी ऋषभ शुक्ला मर्चेंट नेवी से सस्पेंड किया जा चुका है और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से अवैध तरीके से असलहे चुराकर बेचने के आरोप में निकाला गया था▪️ राजेश शुक्ला (पिता) कोई काम-धाम नहीं करता था, लेकिन पुलिस का मुखबिर बताया जाता है▪️ इसके खिलाफ सआदतगंज, ठाकुरगंज, चौक और काकोरी समेत कई थानों में गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं▪️ अन्य पारिवारिक सदस्य जिसमें सतीश शुक्ला (सरकारी बैंक से रिटायर), गिरीश कुमार शुक्ला (सेलटैक्स से रिटायर), और दिनेश शुक्ला उर्फ छुन्ना (नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से रिटायर) बताए जाते हैं
🔴 दो फरार आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस▪️ ADCP पश्चिम धनंजय सिंह कुशवाहा ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी समेत छह लोगों को पहले ही दबोच लिया है▪️ हत्याकांड में शामिल और फरार चल रहे दो अन्य आरोपियों (जिनमें मुख्य आरोपी का चाचा राजेश शुक्ला भी शामिल है) की तलाश में पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं▪️ जल्द ही दोनों फरार अपराधियों को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा और मामले की पैरवी फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराकर नजीर पेश करने वाली सजा दिलाई जाएगी
🔴 हत्यारोपी ऋषभ शूटिंग में गोल्ड मेडल जीत चुका▪️ पुलिस और स्थानीय लोगों के मन में सवाल था कि कोई व्यक्ति इतनी बेरहमी से तीन लोगों को कैसे भून सकता है▪️ जांच में पता चला कि आरोपी ऋषभ शूटिंग में गोल्ड मेडल जीत चुका है और उसे हथियार चलाने की विशेष ट्रेनिंग भी मिली हुई थी▪️ जिस तरह से उसने मैगजीन बदलकर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, उससे साफ है कि वह हथियारों के संचालन में पूरी तरह माहिर था▪️ ऋषभ सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था, उसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 34.5 हजार (34,500) फॉलोअर्स हैं, जबकि वह खुद 69 लोगों को फॉलो करता था▪️ उसकी प्रोफाइल पर अलग-अलग घातक बंदूकों के साथ कई तस्वीरें और वीडियो पोस्ट हैं▪️ वह सिगरेट, शराब और पार्टियों का शौकीन था और पूरी तरह रंगबाजी व फिल्मी अंदाज में जिंदगी जीता था▪️ इसके अलावा वह खुद को शेख और डॉग लवर भी बताता था
शिवाजी तिवारी के फुफेरे भाई मनोज अवस्थी ने तीनों का दाह संस्कार किया, उन्होंने बताया कि करीब 50 साल पहले शिवाजी तिवारी के पिता चंद्रभान तिवारी ने आरोपित परिवार को कालोनी में बसाया था। आरोपित परिवार के उस समय के मुखिया डीके शुक्ला की हरदोई की काटन मिल में नौकरी भी लगवाई थी। उन्होंने कहा कि सबकुछ छह माह में बदल गया। आरोपितों ने वंश ही खत्म कर दिया। अब शिवाजी के परिवार में कोई पुरुष सदस्य बचा ही नहीं।
सुयश और ऋषभ अच्छे दोस्त थे। सुयश और ऋषभ बचपन से ही अच्छे दोस्त थे। दोनों सीएमएस अशरफाबाद में पढ़ाई करते थे। ऋषभ एक कक्षा आगे था। बावजूद इसके उसकी ऋषभ से अच्छी दोस्ती थी। दोनों एक ही रिक्शे से स्कूल आते-जाते थे। छुट्टी होने पर एक साथ ही खेलते थे। मेला-बाजार भी साथ जाते थे। दोनों परिवारों की महिलाओं में अच्छी दोस्ती थी।
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