मैनपुरी जिले (किश्नी के पास) में गंगा बेसिन के भारत-गंगा के मैदानी इलाकों के बीच स्थित झील
देश में अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों (रामसर स्थलों) की कुल संख्या 103
जलपक्षियों और प्रवासी प्रजातियों (जैसे सारस क्रेन, कॉमन पोचार्ड आदि) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण
नई दिल्ली: 16 अक्टूबर 2026
भारत के रामसर वेटलैंड नेटवर्क में जोड़े गए दो नए स्थल चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि (Sukhna Wetland) और उत्तर प्रदेश की सौज झील (Sauj Jheel) हैं। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा की गई इस घोषणा के बाद अब देश में अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों (रामसर स्थलों) की कुल संख्या 103 हो गई है।
दोनों नए स्थलों की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
1. सुखना आर्द्रभूमि (चंडीगढ़)विशेषता: यह चंडीगढ़ में स्थित एक बेहद प्रसिद्ध और पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण मानव निर्मित झील व आर्द्रभूमि है।
महत्व: यह क्षेत्र जैव विविधता के संरक्षण और सेंट्रल एशियन फ्लाईवे (Central Asian Flyway) के माध्यम से आने वाले कई प्रवासी पक्षियों के लिए एक प्रमुख आश्रय स्थल के रूप में काम करता है।
2. सौज झील (उत्तर प्रदेश)स्थान: यह उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले (किश्नी के पास) में गंगा बेसिन के भारत-गंगा के मैदानी इलाकों के बीच स्थित है।
महत्व: यह झील भी जलपक्षियों और प्रवासी प्रजातियों (जैसे सारस क्रेन, कॉमन पोचार्ड आदि) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विशेष रिकॉर्ड: इसके जुड़ने के साथ ही मैनपुरी भारत का पहला और इकलौता ऐसा जिला बन गया है, जिसमें दो रामसर साइट्स (सौज झील और 2019 में घोषित समान पक्षी अभयारण्य) स्थित हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में कुल रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है।
यह विस्तार पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण, जल सुरक्षा को बढ़ावा देने और स्थानीय आजीविका को बनाए रखने की दिशा में भारत की एक बड़ी उपलब्धि है।
x




0 Comments