अनूप कुमार शुक्ल की सोशल मीडिया पोस्ट से:
जब बैसवारा मे गाँव गढ़ाकोला आते जुही मे सरस्वती के संपादक आचार्य द्विवेदी जी से जरुर मिलते
महाप्राण निराला ने कनपुरिया मजदूरों की आवाज अपनी कविता में उकेरी
"महंगू महंगा रहा" शीर्षक कविता कानपुर के एक मजदूर की व्यथा कथा है ।
कानपुर से महाप्राण निराला व उनके जामाता के प्रवास का संदर्भ
कानपुर: 15 अक्टूबर 2026
Anoop Shukla 10 घंटे ·
कनपुरिया मजदूरो की पीड़ा व्यक्त करने वाले महाकवि 'निराला' घंटे पहले
महाप्राण निराला और कानपुर
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महाप्राण निराला (प. सूर्यकांत त्रिपाठी ' निराला ') का कानपुर से जुड़ाव द्विवेदी युग से रहा | जब भी बैसवारा मे अपने गाँव गढ़ाकोला आते तो कानपुर मे जुही मोहल्ले मे सरस्वती पत्रिका के संपादक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी से जरुर मिलते, यद्यपि निराला जी कविताओं से द्विवेदी जी संतुष्ट नही थे | इसके अलावा कानपुर मे कई कवि मंचो पर कविता पाठ किया जैसे जुही की कली आदि कवियो के हसने पर अपनी उक्तियो से उनका मुँह बंद किया था | निराला जी सुकवि प. जगदम्बाप्रसाद हितैषी से मिलने आते और उनका आचार्य गयाप्रसाद शुक्ल सनेही, आचार्य लक्ष्मीधर बाजपेयी और प. बालकृष्ण शर्मा नवीन से भी कानपुर मे भेटे होती थी | गीतकार सुनील बाजपेयी के पिता सुकवि उमाशंकर बाजपेयी व डा. माधवीलता शुक्ला लखनऊ प्रवास मे निराला जी से जुड़े रहे | विकास बाजपेयी ने निराला जी का इन्टरव्यु प्रयाग मे लिया था जो बाद मे कानपुर से प्रकाशित हुआ | निराला जी पर कानपुर से कई गवेषणात्मक ग्रंथ निकले है |
महाप्राण निराला के शिष्य व जामाता शिवशेखर द्विवेदी जी ने जब कोलकाता छोड़कर कानपुर आए तो वह प. विष्णुदत्त शुक्ल के पत्र सहयोगी मे संपादन सहकारी बने | सहयोगी पत्र बिरिहाना रोड से निकलता था जहाँ से पहले जागरण भी निकलता था | इस प्रकार कानपुर से महाप्राण निराला व उनके जामाता के प्रवास का संदर्भ मिलता है |
महाप्राण निराला ने कनपुरिया मजदूरों की आवाज अपनी कविता में उकेरी । "महंगू महंगा रहा" शीर्षक कविता कानपुर के एक मजदूर की व्यथा कथा है ।
लखनऊ से प्रकाशित "माधुरी" फरवरी ,१९२८ ई० मे महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" की कविता । निराला जी ने यह कविता डी ए वी कालेज कानपुर मे आयोजित कवि सम्मेलन मे सभापति आसन से पढ़ी थी ।
कनपुरिया मजदूरो की पीड़ा व्यक्त करने वाले
महाकवि 'निराला'
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