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सेल्फ-फाइनेंसिंग प्रोफेशनल कॉलेजों में कोर्स के बीच में फीस नहीं बढ़ाई जा सकती: और प्रोफेशनल कोर्स (जैसे इंजीनियरिंग, मेडिकल या फार्मेसी) की पूरे अवधि की फीस दाखिले (Admission) से पहले ही तय और अधिसूचित की जानी चाहिए।


 सत्र में फीस संशोधन बेहद असाधारण और अप्रत्याशित परिस्थितियों में ही किया जा सकता
 4 या 5 साल के प्रोफेशनल कोर्स में  शुरुआत में ही पता होना चाहिए कि कितना वित्तीय भार आने वाला है। 

कानपुर: 15 अक्टूबर 2026
नई दिल्ली: 15 अक्टूबर 2026
सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए आदेश दिया है कि सेल्फ-फाइनेंसिंग प्रोफेशनल कॉलेजों में कोर्स के बीच में फीस नहीं बढ़ाई जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रोफेशनल कोर्स (जैसे इंजीनियरिंग, मेडिकल या फार्मेसी) की पूरे अवधि की फीस दाखिले (Admission) से पहले ही तय और अधिसूचित की जानी चाहिए।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने 14 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस फैसले में छात्रों और अभिभावकों के वित्तीय हितों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा है।
फैसले की मुख्य बातें:
शुरुआत में ही वित्तीय स्पष्टता: कोर्ट ने कहा कि 4 या 5 साल के प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश लेने वाले छात्र और उनके परिवारों को शुरुआत में ही यह पता होना चाहिए कि उन पर कितना वित्तीय भार आने वाला है। कई परिवार इसके लिए एजुकेशन लोन लेते हैं, इसलिए बीच में फीस बढ़ाना उनके साथ अन्याय है।
केवल अपवाद स्थितियों में छूट: बीच सत्र में फीस संशोधन केवल बेहद असाधारण और अप्रत्याशित परिस्थितियों में ही किया जा सकता है, जैसे कि किसी संस्थान का खर्च अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गया हो या कोई कानूनी बदलाव हुआ हो।
हाईकोर्ट के फैसले को रखा बरकरार: सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस निर्णय को सही ठहराया, जिसने पश्चिम बंगाल में बी.टेक (B.Tech) छात्रों पर बीच सत्र में थोपी गई फीस बढ़ोतरी को रद्द कर दिया था।
संस्थानों और फीस निर्धारण समितियों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि वे एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही पूरे कोर्स का फीस स्ट्रक्चर जारी कर दें। 
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