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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर, 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर

इस साल दूसरा भारत दौरा पहले वे मई 2026 में Quad विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने  दिल्ली आए थे। 
मार्को रुबियो मुंबई में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्री उज्बेकिस्तान के समरकंद शहर में 'C5+1' मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल होंगे
 वे 200 से अधिक व्यापारिक नेताओं वाले एक बड़े अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। 


कानपुर: 15 अक्टूबर 2026
नई दिल्ली: 15 अक्टूबर 2026
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर, 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं, जिसमें वे देश की राजधानी नई दिल्ली को छोड़कर केवल मुंबई और गुजरात के जामनगर जाएंगे। अमेरिकी विदेश विभाग (US Department of State) द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, यह इस साल उनका दूसरा भारत दौरा है। इससे पहले वे मई 2026 में क्वाड (Quad) विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली आए थे। 
इस विशेष दौरे से जुड़े मुख्य बिंदु और एजेंडा नीचे दिए गए हैं:
मुंबई में उच्च स्तरीय बैठकें: मार्को रुबियो मुंबई में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दिल्ली के अधिकारी भी इस बैठक के लिए मुंबई पहुंचेंगे। इसके अलावा, वे अमेरिकी वाणिज्यिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए व्यापारिक नेताओं से मिलेंगे। 
जामनगर में रिलायंस रिफाइनरी का दौरा: वे गुजरात के जामनगर का दौरा करेंगे, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज के विशाल कच्चे तेल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स (दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट रिफाइनरी हब) का केंद्र है। यहां उनकी रिलायंस के अधिकारियों और मुकेश अंबानी से मुलाकात होने की उम्मीद है। 
मुख्य एजेंडा और फोकस: इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग (Energy Cooperation) को आगे बढ़ाना, रणनीतिक साझेदारी मजबूत करना और क्षेत्रीय व वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है।
मध्य एशिया से भारत का सफर: भारत आने से पहले, अमेरिकी विदेश मंत्री उज्बेकिस्तान के समरकंद शहर में 'C5+1' मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल होंगे, जहां वे 200 से अधिक व्यापारिक नेताओं वाले एक बड़े अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। 
यह दौरा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच व्यापार, टैरिफ और भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर बातचीत और नीतियां चर्चा के केंद्र में हैं।
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