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रक्षा अधिग्रहण परिषद: रक्षा खरीद को बड़ी मंजूरी, ₹2.12 लाख करोड़ के सैन्य उपकरणों की खरीद को हरी झंडी

फैसले का उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता बढ़ाना,
 रक्षा खरीद से स्वदेशी रक्षा उद्योग और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद
रक्षा क्षेत्र में मंजूरी को भारत की दीर्घकालिक सैन्य आधुनिकीकरण योजना के लिहाज से महत्वपूर्ण

कानपुर: 26 अक्टूबर 2026
नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। परिषद ने करीब ₹2.12 लाख करोड़ के सैन्य उपकरणों और हथियारों की खरीद के प्रस्तावों को मंजूरी दी है।
फैसले का उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता बढ़ाना, आधुनिक सैन्य तकनीक से लैस करना और रक्षा तैयारियों को और मजबूत करना है। बड़ी मात्रा में रक्षा खरीद से स्वदेशी रक्षा उद्योग और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रक्षा क्षेत्र में  मंजूरी को भारत की दीर्घकालिक सैन्य आधुनिकीकरण योजना के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब स्वीकृत प्रस्तावों के तहत खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
रक्षा अधिग्रहण परिषद: 
भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है, जो सशस्त्र बलों (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) के लिए बड़े रक्षा उपकरणों और हथियारों की खरीद संबंधी प्रस्तावों को मंजूरी देती है।
गठन
रक्षा अधिग्रहण परिषद का गठन वर्ष 2001 में कारगिल युद्ध के बाद रक्षा खरीद प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और तेज बनाने के उद्देश्य से किया गया था।
अध्यक्ष एवं सदस्य
अध्यक्ष: भारत के रक्षा मंत्री
सदस्य:चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS)
थल सेना, नौसेना और वायु सेना के प्रमुख
रक्षा सचिव
रक्षा उत्पादन सचिव
रक्षा वित्त से संबंधित वरिष्ठ अधिकारी आदि।
मुख्य कार्यरक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी देना
Acceptance of Necessity (AoN) प्रदान करना, जो रक्षा खरीद प्रक्रिया का पहला आधिकारिक चरण होता है।
खरीद की श्रेणी तय करना, जैसे:Buy (Indian)
Buy (Global)
Buy & Make
Make in India आदि।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना।
सशस्त्र बलों की दीर्घकालिक क्षमता विकास योजनाओं को अनुमोदित करना।
AoN (Acceptance of Necessity) क्या है?
AoN का अर्थ है कि परिषद किसी सैन्य आवश्यकता को सिद्धांततः स्वीकार करती है और उसे आगे की खरीद प्रक्रिया के लिए मंजूरी देती है। अंतिम खरीद अनुबंध बाद के चरणों में होता है।
हाल का उदाहरण
26 अक्टूबर 2026 को DAC ने लगभग ₹2.12 लाख करोड़ की रक्षा खरीद परियोजनाओं को AoN प्रदान किया। इनमें लगभग 82% खरीद भारतीय उद्योगों से किए जाने का प्रावधान है, जिससे "आत्मनिर्भर भारत" और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
महत्वपूर्ण तथ्य
स्थापना वर्ष: 2001
अध्यक्ष: रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च रक्षा खरीद संस्था
AoN प्रदान करने वाली प्रमुख संस्था

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