कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग अपना काम जारी रखेगा
चुनाव मौजूदा नियम और फ्रेमवर्क के आधार पर ही कराए जाएंगे
27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का पालन किया जाएगा।
इलाहाबाद: 14 अक्टूबर 2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 3 महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने का एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
हाईकोर्ट के इस आदेश से जुड़े मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
3 महीने में चुनाव का आदेश: जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाते हुए पूरी चुनाव प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर संपन्न कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसके बाद समय सीमा को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
निवर्तमान प्रधान ही बने रहेंगे प्रशासक: ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किया था। कोर्ट ने इस शासनादेश को वैध माना है और प्रशासकों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं (जिसमें 6 जनहित याचिकाएं भी शामिल थीं) को खारिज कर दिया है। अब नए चुनाव होने तक निवर्तमान प्रधान ही बतौर प्रशासक कार्य करते रहेंगे।
मौजूदा नियमों पर ही होगा चुनाव: कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग अपना काम जारी रखेगा, लेकिन उसके कार्य की वजह से चुनाव पर कोई रोक नहीं लगेगी। चुनाव मौजूदा नियम और तय फ्रेमवर्क के आधार पर ही कराए जाएंगे, जिसमें 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का पालन किया जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प खुला हुआ है।
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