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सुप्रीम कोर्ट: 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रीय गान के समान दर्जा देने वाली याचिका 27 अक्टूबर को सुनवाई

'वंदे मातरम्' को 'जन गण मन' के समान सम्मान देने और संबंध में दिशा-निर्देश बनाने की मांग 
अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई 
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना सुनवाई करने वाली पीठ
 इसी विषय से जुड़ी एक अन्य रिट याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है
न्यायिक निरंतरता के लिए दिल्ली हाई कोर्ट याचिका को  शीर्ष अदालत में ट्रांसफर किया जाना चाहिए।

कानपुर: 23 अक्टूबर 2026
नई दिल्ली: 23 अक्टूबर 2026
'वंदे मातरम्' को राष्ट्रीय गान के समान दर्जा देने वाली याचिका: सुप्रीम कोर्ट 27 अक्टूबर को उस याचिका पर सुनवाई कर सकता है जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित जनहित याचिका को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की गई है। याचिका में 'वंदे मातरम्' को 'जन गण मन' के समान सम्मान देने और इसके संबंध में दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई है। • याचिका के अनुसार, स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रतिदिन 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम्' के गायन/वादन को सुनिश्चित करने के निर्देश भी मांगे गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट 27 अक्टूबर 2026 को अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की उस याचिका पर सुनवाई कर सकता है, जिसमें राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान दर्जा देने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को दिल्ली हाई कोर्ट से शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स  के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर लिस्टेड इस याचिका पर प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ सुनवाई करेगी। 
इस याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदु और मांगें:
मामले को स्थानांतरित करने का कारण: याचिकाकर्ता का तर्क है कि इसी विषय से जुड़ी एक अन्य रिट याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए न्यायिक निरंतरता के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित जनहित याचिका को भी शीर्ष अदालत में ट्रांसफर किया जाना चाहिए।
समान गरिमा और ऐतिहासिक महत्व: याचिका में कहा गया है कि 'वंदे मातरम्' ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। इसके समर्थन में संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा 24 जनवरी 1950 को दिए गए उस बयान का हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने दोनों गीतों को बराबर सम्मान देने की बात कही थी।
शैक्षणिक संस्थानों के लिए निर्देश: याचिका के माध्यम से केंद्र और दिल्ली सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि सभी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रत्येक कार्य दिवस पर 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम्' दोनों का गायन या वादन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए।
व्यावसायिक दुरुपयोग और नाटकीय रूपांतरण पर रोक: याचिकाकर्ता ने चिंता जताई है कि स्पष्ट नियमों के अभाव में फिल्मों, सोशल मीडिया और पार्टियों में इस गीत का अनुचित या व्यावसायिक उपयोग किया जाता है। इसलिए 'वंदे मातरम्' के सम्मान और प्रचार-प्रसार के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने और इसके नाटकीय रूपांतरण पर रोक लगाने की मांग की गई है ताकि इसकी गरिमा बनी रहे।
सुप्रीम कोर्ट 27 अक्टूबर को उस याचिका पर सुनवाई कर सकता है जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित जनहित याचिका को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की गई है। याचिका में 'वंदे मातरम्' को 'जन गण मन' के समान सम्मान देने और इसके संबंध में दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई है। • याचिका के अनुसार, स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रतिदिन 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम्' के गायन/वादन को सुनिश्चित करने के निर्देश भी मांगे गए हैं। 

विषय / विवरण

मुख्य विवरण

संभावित सुनवाई तिथि

27 अक्टूबर 2026

सुनवाई करने वाली पीठ (Bench)

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना

याचिकाकर्ता

अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय (अधिवक्ता अश्वनी दुबे के माध्यम से दाखिल)

प्रमुख मांगें

• दिल्ली हाई कोर्ट से जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर करना
• '
वंदे मातरम्' को राष्ट्रगान के समान दर्जा और कानूनी सुरक्षा देना
•
स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रतिदिन दोनों गीतों का गायन/वादन सुनिश्चित करना
•
फिल्मों, पार्टियों और वैरायटी शोज़ में इसके दुरुपयोग तथा नाटकीय रूपांतरण पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय नीति बनाना                                                                                                        

अश्विनी उपाध्याय (जन्म : 17 मार्च 1975 ) भारत के एक राजनेता और वकील हैं। वे वर्तमान में भारत के सर्वोच्च न्यायालय में वकील और भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई के नेता हैं। 2011 में, उन्होंने अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन में शामिल होने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और बाद में नवगठित आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए, जिसके वे संस्थापक सदस्यों में से एक थे।
वे जनहित याचिकाएँ दाखिल करने के लिये प्रसिद्ध हैं। उनकी अश्विनी लगभग 125 जनहित याचिकाएँ सर्वोच्च न्यायालय में और 25 जनहित याचिकाएँ दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित हैं। कई बार उनकी अर्जियां खारिज भी हुईं, लेकिन अधिकांश याचिकाएँ ऐसी रही हैं, जिन पर सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा वे भारत में विधिक सुधार के प्रबल समर्थक हैं।


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