बेहतर रोजगार सृजन के बिना स्थिति में बड़ा सुधार कठिन होगा।
2026 में 811 मिलियन लोग (विश्व की 10% आबादी) प्रतिदिन 3 डॉलर से कम पर जीवन यापित
अत्यधिक गरीबी का बड़ा हिस्सा कुछ ही देशों में केंद्रित है
भारत में अत्यधिक गरीबी की दर 2011-12 में 27.1 % जो 2023 में घटकर 2.6 %
4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के आधार पर गरीबी दर 57.7% से घटकर 16.1%
कानपुर: 26 अक्टूबर 2026
26 अक्टूबर 2026 को World Bank Group ने अपनी नई रिपोर्ट"Poverty, Prosperity, and Planet Report 2026" जारी की। रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर अत्यधिक गरीबी कम होने की रफ्तार लगभग रुक गई है और बेहतर रोजगार सृजन के बिना स्थिति में बड़ा सुधार कठिन होगा।
2026 में लगभग 811 मिलियन लोग (विश्व की लगभग 10% आबादी) प्रतिदिन 3 डॉलर से कम पर जीवन यापन कर रहे हैं।
World Bank के अनुसार यदि प्रति व्यक्ति आर्थिक वृद्धि मजबूत नहीं हुई, तो 2030 में अत्यधिक गरीबी में रहने वालों की संख्या आज से अधिक हो सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया कि अत्यधिक गरीबी का बड़ा हिस्सा कुछ ही देशों में केंद्रित है, जबकि 2030 तक अधिकांश गरीब आबादी उप-सहारा अफ्रीका और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में रहने की संभावना है।
Pablo Saavedra, World Bank Group के Vice President for Prosperity, ने कहा कि गरीबी कम करने के लिए तेज आर्थिक विकास और अधिक रोजगार अवसर आवश्यक हैं।
यह रिपोर्ट उस समय आई है जब बैंकॉक में IMF-World Bank Annual Meetings 2026 के दौरान वैश्विक विकास, रोजगार, ऋण और आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा चल रही थी।
विश्व बैंक की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
गरीबी में आई गिरावट भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि, इस उपलब्धि को लंबे समय तक बनाए रखना भी जरूरी है। इसके लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और लोगों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने पर ध्यान देना होगा। विश्व बैंक और नीति आयोग के आंकड़े भारत में गरीबी घटने की उल्लेखनीय प्रगति दर्शाते हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि गरीबी से बाहर निकले परिवार आर्थिक झटकों से सुरक्षित रहें और उन्हें स्थायी रोजगार तथा बेहतर जीवन स्तर के अवसर मिलें।
नई दिल्ली: भारत में पिछले एक दशक के दौरान गरीबी कम करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। विश्व बैंक और नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार, देश में अत्यधिक गरीबी और बहुआयामी गरीबी दोनों में बड़ी गिरावट आई है। इस दौरान करोड़ों लोग गरीबी के दायरे से बाहर निकले हैं।
विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की Poverty and Equity Brief के अनुसार, भारत में अत्यधिक गरीबी की दर 2011-12 में 27.1 प्रतिशत थी, जो 2023 में घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई। वहीं, 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के आधार पर गरीबी दर 57.7 प्रतिशत से घटकर 16.1 प्रतिशत हो गई।
रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में लगभग 49.6 करोड़ लोग इस गरीबी रेखा से ऊपर आए। भविष्य के अनुमान बताते हैं कि इस श्रेणी में गरीबी दर 2026 में करीब 14.2 प्रतिशत और 2028 तक 12.1 प्रतिशत हो सकती है।
नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के अनुसार, भारत में बहुआयामी गरीबी की दर 2013-14 में 29.17 प्रतिशत थी, जो 2022-23 में घटकर 11.28 प्रतिशत रह गई। इस अवधि में लगभग 24.82 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले।
बहुआयामी गरीबी का आकलन केवल आय के आधार पर नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर जैसी बुनियादी सुविधाओं को ध्यान में रखकर किया जाता है।




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