लोन की ब्याज दरें बढ़ जाएंगी, जिससे आपकी मासिक EMI महंगी हो जाएगी.
नयी दिल्ली: 07 अक्टूबर 2026
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज, 7 अक्टूबर 2026 को अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में एक बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) बढ़ाकर 5.50% कर दिया है. लगातार मिल रही आर्थिक मजबूती को देखते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत का GDP ग्रोथ अनुमान भी बढ़ाकर 7.1% कर दिया है (जो पहले 6.7% था).
बढ़ती महंगाई और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनावों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने करीब 44 महीनों (साढ़े तीन साल) के बाद ब्याज दरों में यह बढ़ोतरी की है.
प्रमुख नीतिगत दरें और बदलाव
आरबीआई ने अपनी नीतिगत रुख (Policy Stance) को 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (क्रमिक सख्ती) कर दिया है. इस फैसले के बाद नई दरें इस प्रकार हैं: [1]पॉलिसी रेपो रेट: 5.25% से बढ़कर 5.50%
स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट: 5.25%
मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट: 5.75%
बैंक रेट (Bank Rate): 5.75%
FY27 GDP ग्रोथ अनुमान: 6.7% से बढ़कर 7.1%
FY27 कोर महंगाई (Core Inflation) अनुमान: 4.3% से बढ़कर 4.4%
आम जनता और आपकी EMI पर क्या असर होगा?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से कर्ज लेते हैं. इसमें बढ़ोतरी होने से बैंकों की फंडिंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिसके चलते आम उपभोक्ताओं के लिए कर्ज महंगे हो जाएंगे:
लोन की अवधि बढ़ना: कुछ बैंक ग्राहकों की तुरंत EMI बढ़ाने के बजाय उनके लोन की रीपेमेंट अवधि (Tenure) को लंबा कर सकते हैं.
FD पर ज्यादा ब्याज: एक सकारात्मक पहलू यह है कि आने वाले दिनों में बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और बचत खातों पर भी ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं, जिससे जमाकर्ताओं को फायदा होगा.
बाजार और अर्थव्यवस्था का दृष्टिकोण
आरबीआई का यह फैसला दिखाता है कि केंद्रीय बैंक देश की मजबूत आर्थिक रफ्तार को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है, लेकिन क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों और ग्लोबल अनिश्चितताओं के कारण महंगाई को काबू में रखना उसकी पहली प्राथमिकता है.




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