उसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेता आकाशवाणी भवन परिसर में घुसकर लगभग 8-9 घंटे का धरना दिया।
दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई सांसदों को हिरासत में लिया और बाद में रिहा कर दिया।
राहुल गांधी के बयान“हम सिर्फ उनका (भाजपा का) मुकाबला नहीं कर रहे, हम उन्हें नष्ट कर देंगे। मैं लोकतंत्र बचाने के लिए खड़ा हूं।”
“देश के साथ जो किया गया है वह देशद्रोह है। मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत या ज्ञानेश कुमार—किसी को नहीं बख्शा जाएगा।”
एक्स पर पोस्ट: “ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो। अब इस्तीफा देने का समय है।”
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची संशोधन में बड़े पैमाने पर नाम काटे गए और CEC भाजपा के हित में काम कर रहा है। चुनाव आयोग और भाजपा ने इन आरोपों का खंडन किया है। भाजपा ने इसे “राहुल गांधी को दोबारा लॉन्च करने के लिए अराजकता फैलाने की कोशिश” बताया।
यह दिन राहुल गांधी और विपक्ष के “वोट चोरी” अभियान का सबसे बड़ा सड़क प्रदर्शन था।
मुख्य घटनाक्रम
दिल्ली और लखनऊ में विशाल रैलियाँ:
राहुल गांधी ने “वोट चोरी” अभियान को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला।
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि हाल के उपचुनावों और विधानसभा चुनावों में ईवीएम और वोट गिनती प्रक्रिया में धांधली हुई है।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का संयुक्त प्रदर्शन:
कार्यकर्ताओं ने “लोकतंत्र बचाओ” और “वोट चोरी बंद करो” जैसे नारे लगाए।
कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़पें भी हुईं।
वाराणसी और प्रयागराज में विरोध मार्च:
छात्रों और युवाओं ने भी इस अभियान में हिस्सा लिया।
मुख्य मुद्दे: NEET पेपर लीक, बेरोजगारी और चुनावी पारदर्शिता।
राजनीतिक असर
भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को “झूठा और भ्रामक” बताया।
कांग्रेस और सहयोगी दल इसे 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले जनता को जोड़ने की रणनीति मान रहे हैं।
मीडिया कवरेज में राहुल गांधी का यह प्रदर्शन दिनभर सुर्खियों में रहा।




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