दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष और नेल्सन मंडेला व कई कार्यकर्ताओं को कानूनी मदद प्रदान की।
सम्मान "शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके असाधारण प्रयासों" के लिए दिया गया है।कानपुर: 10 अक्टूबर 2026
नयी दिल्ली: 10 अक्टूबर 2026
नॉर्वे की नोबेल समिति ने 9 अक्टूबर 2026 को भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नवनेथम "नावी" पिल्लै (Navanethem "Navi" Pillay) को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की है।
नोबेल समिति के अनुसार, उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान "शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके असाधारण प्रयासों" के लिए दिया गया है।
पिल्लै के लंबे और प्रभावशाली करियर की कुछ मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
नस्लभेद के खिलाफ जंग: दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद (Apartheid) के दौर में उन्होंने नस्लीय भेदभाव का कड़ा मुकाबला किया और नेल्सन मंडेला सहित कई रंगभेद-विरोधी कार्यकर्ताओं को कानूनी मदद प्रदान की।
वंचितों और पीड़ितों के लिए कानूनी मदद: वह दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट की पहली गैर-श्वेत महिला जज बनीं। उन्होंने व्यक्तिगत और संस्थागत भेदभाव के खिलाफ पीड़ितों, विशेषकर महिलाओं और प्रताड़ित लोगों के अधिकारों की रक्षा की।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योगदान: उन्होंने इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल फॉर रवांडा (ICTR) की प्रेसिडेंट, इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) की जज और 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र (UN) की मानवाधिकार प्रमुख (High Commissioner for Human Rights) के रूप में अपनी सेवाएँ दीं।
ऐतिहासिक निर्णय: रवांडा नरसंहार मामले में सुनवाई के दौरान उन्होंने बलात्कार और यौन हिंसा को 'मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार का हिस्सा' घोषित करने में अहम भूमिका निभाई थी। वर्तमान में वह इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में म्यांमार के खिलाफ चल रहे मामले में भी जज हैं।
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मुख्य तथ्य |
विवरण |
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पुरस्कार विजेता |
नवनेथम "नावी" पिल्लै (भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी नागरिक) |
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पुरस्कार श्रेणी |
नोबेल शांति पुरस्कार (2026) |
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घोषणा की तिथि |
9 अक्टूबर 2026 |
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पुरस्कार का मुख्य कारण |
अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकारों की रक्षा और शांति को बढ़ावा देना |
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पूर्व प्रमुख पद |
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख (2008-2014) |




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