फरवरी 2023 के बाद ब्याज दरों में पहली बढ़ोतरी होगी
खुदरा मुद्रास्फीति का बढ़कर 4.82% होना RBI के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर
नई दिल्ली:: 04 अक्टूबर 2026
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की आगामी बैठक में रेपो रेट को 5.25% से बढ़ाकर 5.50% (25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी) किए जाने का अर्थशास्त्रियों का यह अनुमान पूरी तरह से वर्तमान वृहद आर्थिक (macroeconomic) दबावों पर आधारित है। यदि ऐसा होता है, तो यह फरवरी 2023 के बाद ब्याज दरों में पहली बढ़ोतरी होगी।
दर बढ़ोतरी के 3 मुख्य कारण (Triggers)
अर्थशास्त्रियों के इस अनुमान के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण हैं:
मुद्रास्फीति (Inflation) में उछाल:
खुदरा मुद्रास्फीति का बढ़कर 4.82% होना RBI के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर है।
महंगा कच्चा तेल (Crude Oil > $100): वैश्विक तनावों के कारण कच्चे तेल का $100/बैरल पार करना भारत के लिए 'आयातित मुद्रास्फीति' (imported inflation) का जोखिम बढ़ाता है।
कमजोर होता रुपया (INR > 96): अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का 96 के पार जाना आयात को महंगा बना रहा है, जिससे चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ने का खतरा है।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव (Impact)
इस संभावित बढ़ोतरी के कारण आपको निम्नलिखित आर्थिक बदलावों और विकल्पों (Trade-offs) का सामना करना पड़ सकता है:
लोन की EMI बढ़ेगी: होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसी फ्लोटिंग दर वाली उधारी महंगी हो जाएगी।
बैंकों का विकल्प: बैंक आपको EMI बढ़ाने या लोन की अवधि (Tenure) लंबी करने का विकल्प देंगे।
बचतकर्ताओं को फायदा: फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और सेविंग्स अकाउंट पर मिलने वाली ब्याज दरों में बढ़ोतरी होगी।
कॉर्पोरेट सेक्टर: मजबूत बैलेंस शीट के कारण भारतीय कंपनियों पर इसका असर सीमित रहने की उम्मीद है।
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