अस्मिता ने अपने खेल जीवन की शुरुआत एक 800 मीटर धाविका के रूप में की
वह जिला स्तरीय ट्रायल्स में भी चुनी गई थीं।मिट्टी का घर:पिता साइकिल मैकेनिक
कानपुर: 8 अगस्त 2026
ग्लासगो: 8 अगस्त 2026
ग्लासगो 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की अस्मिता डे ने जूडो के महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो स्पर्धा में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली खिलाड़ी (पुरुष या महिला) बन गई हैं।
इस ऐतिहासिक जीत और अस्मिता के संघर्ष से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
पारिवारिक पृष्ठभूमि और संघर्ष साइकिल मैकेनिक पिता: अस्मिता डे त्रिपुरा के बेलोनिया (South Tripura) के एक छोटे से गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता, स्वर्गीय अर्जुन कुमार डे, साइकिल मरम्मत की दुकान चलाते थे और रोजाना करीब 300 रुपये कमाते थे।
मिट्टी का घर: आर्थिक तंगी के कारण उनका परिवार एक साधारण मिट्टी के घर में रहता था, लेकिन उनके माता-पिता ने कभी भी गरीबी को अस्मिता के सपनों के आड़े नहीं आने दिया।
भावुक कर देने वाली त्रासदी: राष्ट्रमंडल खेलों के चयन ट्रायल्स से ठीक सात महीने पहले, दिसंबर 2025 में अस्मिता के पिता का 'ब्रेन स्ट्रोक' के कारण निधन हो गया था। इस दुःख से उबरकर उन्होंने अपनी मां के प्रोत्साहन पर अपनी ट्रेनिंग जारी रखी और पिता के सपने को पूरा किया।
एथलेटिक्स से जूडो तक का सफर शुरुआत रनिंग से: अस्मिता ने अपने खेल जीवन की शुरुआत एक 800 मीटर धाविकाके रूप में की थी और वह जिला स्तरीय ट्रायल्स में भी चुनी गई थीं।
कोच की सलाह: बाद में उनके एक कोच ने उन्हें जूडो खेल से परिचित कराया, जिसके बाद उनकी रुचि इस कॉम्बैट स्पोर्ट में बढ़ती चली गई।
उत्तर प्रदेश पुलिस में नौकरी: खेल क्षेत्र में उनके बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस में नौकरी मिली, जिससे उन्हें आर्थिक संबल मिला। वर्तमान में वह नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (भोपाल) में कोच यशपाल सोलंकी के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग ले रही हैं।
रोमांचक फाइनल मुकाबला
अस्मिता ने फाइनल मुकाबले में कनाडा की हेइडी क्वाच को मात दी। निर्धारित 4 मिनट के समय तक मुकाबला बराबरी पर रहने के बाद, खेल 'गोल्डन स्कोर' (अतिरिक्त समय) में गया, जहाँ अस्मिता ने शानदार दांव लगाकर निर्णायक अंक हासिल किया और 2-1 से मुकाबला अपने नाम कर लिया।
अस्मिता की इस अभूतपूर्व सफलता पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा सहित देश की कई बड़ी हस्तियों ने उन्हें बधाई दी है और इसे भारतीय खेलों के लिए एक मील का पत्थर बताया है।




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