रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान 18 जुलाई को ब्लैक सी में मालवाहक जहाज पर हुए यूक्रेनी ड्रोन हमले में गई जान
घटना के 18 दिन बाद उनका पार्थिव शरीर एयर एंबुलेंस के जरिए कानपुर पहुंचा।
हमले के बाद सागर गुप्ता ने जहाज पर मौजूद 8 क्रू मेंबर्स की जान बचा सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
जान बचा जब वे जहाज को सुरक्षित क्षेत्र में ले जा रहे थे, तभी दूसरे हमले में वे वीरगति को प्राप्त
कानपुर: 6 अगस्त 2026
कानपुर के शास्त्री नगर निवासी मर्चेंट नेवी के चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता का अंतिम संस्कार गुरुवार को भैरव घाट पर कर दिया गया। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान 18 जुलाई को ब्लैक सी (काला सागर) में एक मालवाहक जहाज पर हुए यूक्रेनी ड्रोन हमले में उनकी जान चली गई थी। घटना के 18 दिन बाद उनका पार्थिव शरीर एयर एंबुलेंस के जरिए कानपुर पहुंचा।
घटना की मुख्य बातें
- बहादुरी का परिचय: पहले ड्रोन हमले के बाद सागर गुप्ता ने जहाज पर मौजूद 8 क्रू मेंबर्स की जान बचाई और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद जब वे जहाज को सुरक्षित क्षेत्र में ले जा रहे थे, तभी दूसरे हमले में वे वीरगति को प्राप्त हो गए।
- अंतिम संस्कार: गुरुवार सुबह भैरव घाट पर बड़े भाई मनीष गुप्ता ने उन्हें मुखाग्नि दी।
- तिरंगा: परिजनों का आरोप है कि सरकार की तरफ से तिरंगा नहीं दिया गया, जिसके बाद उन्होंने खुद बाजार से तिरंगा खरीदकर पार्थिव शरीर पर ओढ़ाया।
सागर गुप्ता की भतीजी लक्ष्मी गुप्ता ने सदर तहसीलदार विनय कुमार द्विवेदी को लिखित ज्ञापन सौंपकर सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- सागर गुप्ता को शहीद का दर्जा दिया जाए।
- परिवार और बच्चों के लिए ₹2 करोड़ का मुआवजा मिले।
- आश्रित पत्नी (शालू गुप्ता) को सरकारी नौकरी दी जाए।




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