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संसदीय कार्य मंत्री: 16 से 18 अगस्त 2026 तक संसद का विशेष सत्र बुलाने की खबरों और प्रस्तावों का पूरी तरह से खंडन

131वां संशोधन विधेयक, का लक्ष्य लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 (या 850) करना
जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण (परिसीमन) करना है
अप्रैल 2026 में विधेयक लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण गिर गया था।16–18 विशेष सत्र की खबरें राजनीतिक गलियारों और शुरुआती चर्चाओं के सूत्रों तक सीमित: पूर्ण विराम
कानपुर: 6 अगस्त 2026
नई दिल्ली: 6 अगस्त 2026
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 16 से 18 अगस्त 2026 तक संसद का विशेष सत्र बुलाने की खबरों और प्रस्तावों का पूरी तरह से खंडन किया है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि सरकार के पास फिलहाल महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) पारित कराने के लिए इस प्रकार का विशेष सत्र बुलाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
इस विषय से जुड़े प्रमुख घटनाक्रम और तथ्यों का विवरण नीचे दिया गया है:
आधिकारिक स्थिति और खंडनमंत्री का बयान: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि 16 से 18 अगस्त के बीच विशेष सत्र आयोजित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।चल रहा सत्र: वर्तमान में संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक निर्धारित है। सरकार का कहना है कि यदि इन विधेयकों को दोबारा पेश करना हुआ, तो उन्हें इसी चालू सत्र के बचे हुए दिनों में लाया जा सकता है।
सत्रावसान पर रणनीति: सूत्रों के अनुसार, 13 अगस्त को मानसून सत्र समाप्त होने के बाद संसद का औपचारिक सत्रावसान नहीं किया जाएगा। इससे सरकार को आवश्यकता पड़ने पर बहुत ही कम समय के नोटिस पर संसद को फिर से बुलाने की सुविधा मिलेगी।
विधेयकों की पृष्ठभूमि और सीटों का गणित
विधेयक का उद्देश्य: इस संवैधानिक संशोधन (131वां संशोधन विधेयक, 2026) का मुख्य लक्ष्य लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 (या 850) करना और जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण (परिसीमन) करना है। इसके साथ ही विधायिकाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को जोड़ना है।
पिछली विफलता: इससे पहले अप्रैल 2026 में बजट सत्र के दौरान यह विधेयक लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई (2/3) विशेष बहुमत न मिलने के कारण गिर गया था। उस समय विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे, जबकि पारित होने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी।
बहुमत की तलाश: सरकार तभी इन विधेयकों को आधिकारिक तौर पर पटल पर रखेगी जब वह इन्हें पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल सुनिश्चित कर लेगी।
राजनैतिक हलचल और विपक्ष का रुखआम सहमति की कोशिश: गतिरोध को दूर करने और आम सहमति बनाने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से करीब 50 मिनट तक मुलाकात की थी।
विपक्ष की शर्तें: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों (विशेषकर दक्षिणी राज्यों के दलों जैसे DMK) को परिसीमन के मौजूदा फॉर्मूले पर आपत्ति है, क्योंकि इससे जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों की सीटों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा विपक्ष संसद में अन्य मुद्दों (जैसे छात्र प्रदर्शन और राम मंदिर से जुड़े मामलों) पर चर्चा की मांग कर रहा है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए, 16–18 अगस्त के विशेष सत्र की खबरें केवल राजनीतिक गलियारों और शुरुआती चर्चाओं के सूत्रों तक सीमित थीं, जिन पर सरकार ने पूर्ण विराम लगा दिया है।

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