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स्मार्ट मीटर परियोजना के लिए ₹18,956 करोड़ स्वीकृत: टेंडर ₹27,342 करोड़ में।

स्मार्ट मीटर के नाम पर अवैध वसूली ₹200 करोड़ उपभोक्ताओं के बिलों में समायोजित
करीब 1.73 लाख मीटरों का केंद्रीय प्रणाली से डेटा एक्सचेंज भी ठप पाया गया।
राज्य में नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक
कानपुर: 10 अगस्त 2026
लखनऊ: 10 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश में रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत स्वीकृत रकम से लगभग ₹8,500 करोड़ अधिक मूल्य पर स्मार्ट मीटर का टेंडर जारी होने के कारण एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के लिए ₹18,956 करोड़ स्वीकृत किए थे, लेकिन बिजली कंपनियों ने निजी घरानों को इसका टेंडर ₹27,342 करोड़ की उच्च दरों पर आवंटित कर दिया।
विवाद के मुख्य बिंदु और वर्तमान स्थिति
अतिरिक्त वित्तीय बोझ: उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि इस भारी अंतर की भरपाई उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त शुल्क डालकर या बिजली दरों को बढ़ाकर करने का प्रयास किया जा रहा है। परिषद ने इस मामले की उच्च स्तरीय सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) जांच की मांग की है।
तकनीकी खामियां और विरोध: प्रदेश भर में प्रीपेड स्मार्ट मीटरों में ओवर-बिलिंग, रिचार्ज के बाद भी बैलेंस अपडेट न होना और अचानक बिजली कटने जैसी गंभीर तकनीकी दिक्कतें सामने आईं। इसके अलावा करीब 1.73 लाख मीटरों का केंद्रीय प्रणाली से डेटा एक्सचेंज भी ठप पाया गया।
प्रक्रिया पर अस्थाई रोक और जांच: उपभोक्ताओं के बढ़ते आक्रोश और विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने राज्य में नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा रखी है।
विशेषज्ञ समिति का गठन: तकनीकी गड़बड़ियों और मीटर की कार्यप्रणाली की बारीकी से जांच के लिए चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाई गई है, जिसमें IIT कानपुर के प्रोफेसर भी शामिल हैं। इस समिति की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की नीति तय होगी।
अतिरिक्त शुल्क की वापसी: नियामक आयोग (UPERC) के कड़े निर्देश के बाद, नए कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर के नाम पर अवैध रूप से वसूली गई करीब ₹200 करोड़ की रकम को उपभोक्ताओं के बिलों में वापस समायोजित किया जा रहा है।

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