सरकार को मंदिर को पूजा-पाठ और रख-रखाव के लिए हिन्दू अभिकरण को सौपने मे कोई आपत्ति ?
मैसेकरघाट पर खडा खाली मंदिर १८५७ से सरकार के कब्जे मे
घाट और उसके साथ उस पर बना सलीब व खाली पडे मंदिर का रख -रखाव लोक निर्माण विभाग करता है
फाटक लगे बगीचे और संपर्क मार्ग का रख-रखाव छावनी अभिकरण करता है, सबकुछ छावनी छेत्र मे है |
ऐतिहासिक और भावनात्मक रुचि के स्मारक के रूप मे इमारतो का रख-रखाव किया जाता है
और सरकार उन्हे किसी भी अभिकरण को सौपने को तैयार नही है |
अनूप कुमार शुक्ल की सोशल मीडिया पोस्ट से
Anoop Shukla 3 घंटे·
कानपुर के मैसेकर घाट पर मंदिर
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प्रश्न ११४ श्री गणेशशंकर विद्यार्थी :--क्या सरकार को कानपुर के मैसेकर घाट पर बने मंदिर को पूजा-पाठ और समुचित रख-रखाव के लिए किसी हिन्दू अभिकरण को सौपने मे कोई आपत्ति है ?
उत्तर -मा. सर सैम ओ डानेल :-- मैसेकरघाट पर खडा खाली मंदिर १८५७ से सरकार के कब्जे मे है | घाट और उसके साथ उस पर बना सलीब व खाली पडे मंदिर का रख -रखाव लोक निर्माण विभाग करता है , जबकि फाटक लगे बगीचे और संपर्क मार्ग का रख-रखाव छावनी अभिकरण करता है, सबकुछ छावनी छेत्र मे है | ऐतिहासिक और भावनात्मक रुचि के स्मारक के रूप मे इमारतो का रख-रखाव किया जाता है और सरकार उन्हे किसी भी अभिकरण को सौपने को तैयार नही है |
( कानपुर के "प्रताप" पत्र के सम्पादक श्री गणेशशंकर विद्यार्थी १९२६ से १९२९ तक प्रान्तीय काउनसिल के मेम्बर रहे थे , ये प्रश्न उसी दौरान पूछा गया था )
मैसेकरघाट पर खडा खाली मंदिर १८५७ से सरकार के कब्जे मे
घाट और उसके साथ उस पर बना सलीब व खाली पडे मंदिर का रख -रखाव लोक निर्माण विभाग करता है
फाटक लगे बगीचे और संपर्क मार्ग का रख-रखाव छावनी अभिकरण करता है, सबकुछ छावनी छेत्र मे है |
ऐतिहासिक और भावनात्मक रुचि के स्मारक के रूप मे इमारतो का रख-रखाव किया जाता है
और सरकार उन्हे किसी भी अभिकरण को सौपने को तैयार नही है |
अनूप कुमार शुक्ल की सोशल मीडिया पोस्ट से
Anoop Shukla 3 घंटे·
कानपुर के मैसेकर घाट पर मंदिर
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प्रश्न ११४ श्री गणेशशंकर विद्यार्थी :--क्या सरकार को कानपुर के मैसेकर घाट पर बने मंदिर को पूजा-पाठ और समुचित रख-रखाव के लिए किसी हिन्दू अभिकरण को सौपने मे कोई आपत्ति है ?
उत्तर -मा. सर सैम ओ डानेल :-- मैसेकरघाट पर खडा खाली मंदिर १८५७ से सरकार के कब्जे मे है | घाट और उसके साथ उस पर बना सलीब व खाली पडे मंदिर का रख -रखाव लोक निर्माण विभाग करता है , जबकि फाटक लगे बगीचे और संपर्क मार्ग का रख-रखाव छावनी अभिकरण करता है, सबकुछ छावनी छेत्र मे है | ऐतिहासिक और भावनात्मक रुचि के स्मारक के रूप मे इमारतो का रख-रखाव किया जाता है और सरकार उन्हे किसी भी अभिकरण को सौपने को तैयार नही है |
( कानपुर के "प्रताप" पत्र के सम्पादक श्री गणेशशंकर विद्यार्थी १९२६ से १९२९ तक प्रान्तीय काउनसिल के मेम्बर रहे थे , ये प्रश्न उसी दौरान पूछा गया था )




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