शिक्षकों की योग्यता, प्रमाणपत्रों और छात्रों की वास्तविक संख्या के रिकॉर्ड में धोखाधड़ी
मिड-डे मील से जुड़े बजट आवंटन की भी पड़ताल की जा रही है।
कानपुर:25 अगस्त 2026
लखनऊ:25 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश पुलिस के भ्रष्टाचार निवारण संगठन (Anti-Corruption Organization) ने राज्य के 558 अनुदानित (सरकारी सहायता प्राप्त) मदरसों में हुई कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की प्रारंभिक और गोपनीय जांच शुरू कर दी है। यह पूरा मामला सालाना करीब ₹1,100 करोड़ के सरकारी बजट के इस्तेमाल और उसमें हुई गड़बड़ियों से जुड़ा हुआ है।
इस जांच से जुड़ी मुख्य बातें और आरोप इस प्रकार हैं:
जांच के मुख्य बिंदु और आरोप
शिकायतकर्ता मोहम्मद तलहा अंसारी द्वारा गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और जांच संगठन को भेजी गई 333 पन्नों की शिकायत के आधार पर 35 प्रमुख बिंदुओं पर जांच केंद्रित की गई है:
नियम विरुद्ध नियुक्तियां: आरोप है कि तय मानकों और नियमों की अनदेखी करके मदरसों में शिक्षकों व अन्य स्टाफ की भर्तियां की गईं, जिसमें कोविड काल के दौरान हुई नियुक्तियां भी शामिल हैं।
दस्तावेजों में हेरफेर: शिक्षकों की योग्यता, प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता और छात्रों की वास्तविक संख्या के रिकॉर्ड में कथित रूप से धोखाधड़ी पाई गई है।
फर्जी प्रबंध समितियां: संदिग्ध और अवैध प्रबंध समितियों के जरिए वित्तीय फैसले लेने और सरकारी अनुदान का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है।
वेतन और मिड-डे मील विसंगतियां: कर्मचारियों के वेतन भुगतान में गड़बड़ी और पूर्व में सामने आए मिड-डे मील से जुड़े बजट आवंटन की भी पड़ताल की जा रही है।
जांच की वर्तमान स्थिति जांच अधिकारी: भ्रष्टाचार निवारण संगठन के महानिरीक्षक (IG) मोहित गुप्ता के निर्देश पर उपमहानिरीक्षक (DIG) हरिश्चन्दर को इस मामले की कमान सौंपी गई है।
गोपनीय प्रक्रिया: नियमों के तहत किसी भी एफआईआर (FIR) को दर्ज करने से पहले एजेंसी स्वतंत्र रूप से गुप्त प्राथमिक जांच कर रही है ताकि दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए जा सकें।
पिछला घटनाक्रम: इससे पहले केंद्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के आदेश पर यह जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को दी गई थी, जिस पर उच्च न्यायालय ने क्षेत्राधिकार के सवालों के कारण रोक लगा दी थी। अब राज्य की एंटी-करप्शन विंग नए सिरे से प्रशासनिक स्तर पर इसकी जांच कर रही है।




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