कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी
उत्तर प्रदेश वित्तीय नियम संग्रहखंड-2, भाग 2 से 4 के नियम 153(1) में संशोधन को मंजूरी
निर्णय इलाहाबाद हाईकोर्ट (और इसकी लखनऊ खंडपीठ) द्वारा दिए गए हालिया आदेशों के बाद
उत्तर प्रदेश वित्तीय नियम संग्रहखंड-2, भाग 2 से 4 के नियम 153(1) में संशोधन को मंजूरी
संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 21 - जीवन का अधिकार) को बाधित नहीं कर सकते
लखनऊ:23 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने महिला सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए दूसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश लेने पर दो बच्चों के बीच 2 साल के अंतर (गैप) की बाध्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया है.
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट बाई सर्कुलेशन इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है.
फैसले से जुड़े मुख्य बिंदु और बदलाव :
नियमों में मुख्य संशोधन पुरानी व्यवस्था का अंत: पहले के नियम के मुताबिक, महिला कर्मचारी केवल तभी दूसरी बार मातृत्व अवकाश ले सकती थीं, जब उनके दोनों बच्चों के जन्म के बीच कम से कम दो साल का अंतर हो. अब इस शर्त को हटा दिया गया है.
संशोधित नियम: उत्तर प्रदेश वित्तीय नियम संग्रहखंड-2, भाग 2 से 4 के नियम 153(1) में संशोधन को मंजूरी दी गई है.
पूरी छुट्टी का लाभ: इस बदलाव के बाद महिला कर्मचारी अपने दूसरे बच्चे के जन्म पर भी बिना किसी समय-सीमा की रुकावट के 180 दिनों (6 महीने) के सवेतन मातृत्व अवकाश का लाभ उठा सकेंगी. यह लाभ गोद लेने वाली माताओं (Adoptive Mothers) को भी दिया जाएगा.
फैसला लेने की मुख्य वजह
यह निर्णय इलाहाबाद हाईकोर्ट (और इसकी लखनऊ खंडपीठ) द्वारा दिए गए हालिया आदेशों के बाद लिया गया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (Maternity Benefit Act, 1961) एक केंद्रीय कानून है, और राज्य सरकार के कार्यकारी नियम महिला कर्मचारियों के इस संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 21 - जीवन का अधिकार) को बाधित नहीं कर सकते. इसी के तहत कोर्ट ने दो साल का अंतर न होने के आधार पर छुट्टी रोकने के पुराने आदेशों को निरस्त कर दिया था.
ऐतिहासिक फैसले से कामकाजी महिलाओं को अपने परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी और मातृत्व स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित होगी.




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