सुप्रीम कोर्ट की इस विशेष पहल का मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करना
न्यायिक समय बचाऔर बिना किसी हार-जीत की कड़वाहट के त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करना
जिससे चार से पांच दशक पुराने जटिल मुकदमों का अंत
कानपुर:27 अगस्त 2026
नई दिल्ली: 27 अगस्त 2026
सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के 'समाधान समारोह 2026' के तहत आयोजित तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत ने कुल 1,712 लंबित मामलों का निपटारा कर ऐतिहासिक मिसाल कायम की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के मार्गदर्शन में 21 अगस्त से 23 अगस्त 2026 तक चली इस पहल में आपसी सहमति, मध्यस्थता और आधुनिक तकनीक (डिजिटल सहमति) का अनूठा तालमेल देखने को मिला, जिससे चार से पांच दशक पुराने जटिल मुकदमों का अंत हुआ। नई दिल्ली: 27 अगस्त 2026
समाधान समारोह 2026 की मुख्य विशेषताएं और निपटारे के बड़े मामले इस प्रकार हैं:
प्रमुख सांख्यिकी (Stats)कुल निपटारे:
विशेष लोक अदालत और मध्यस्थता के माध्यम से 1,712 मामलों का समाधान हुआ।
वितरित राशि: पक्षकारों के बीच कुल ₹240.94 करोड़ से अधिक की राशि का निपटारा और वितरण हुआ।
वितरित राशि: पक्षकारों के बीच कुल ₹240.94 करोड़ से अधिक की राशि का निपटारा और वितरण हुआ।
समय सीमा: यह अभियान 21 अप्रैल 2026 को पूर्व-समझौता प्रक्रिया (Pre-settlement) के साथ शुरू हुआ था, जिसका समापन अगस्त के तीन दिवसीय समारोह में हुआ।
दशकों पुराने मामलों का डिजिटल और सौहार्दपूर्ण अंतअयोध्या का 54 साल पुराना भूमि विवाद (डिजिटल सहमति):
दशकों पुराने मामलों का डिजिटल और सौहार्दपूर्ण अंतअयोध्या का 54 साल पुराना भूमि विवाद (डिजिटल सहमति):
मामला: 'हरि हर दत्त लाल बनाम वारिश अला' का यह मामला अयोध्या की खेती की जमीन से जुड़ा था, जिसकी शुरुआत 1972 के एक समझौते से हुई थी।
तकनीक का इस्तेमाल: इस केस के एक मुख्य प्रतिवादी (मोहम्मद तौसीफ) वर्तमान में दुबई में रहते हैं। उन्होंने वहां हिंदी में तैयार समझौता-पत्र का प्रिंट निकालकर हस्ताक्षर किए और व्हाट्सऐप (WhatsApp) पर स्कैन कॉपी भारत भेजी।
निर्णय: जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने इस डिजिटल सहमति को स्वीकार किया। इसके तहत अपीलकर्ता को 53% उत्तरी हिस्सा और प्रतिवादी को 47% दक्षिणी हिस्सा मिला। [1]
सऊदी अरब से जुड़ा 48 साल पुराना वाणिज्यिक विवाद:मामला: 'अलमस्तानीर एस्टैब्लिशमेंट फॉर ट्रेड बनाम सिंडिकेट बैंक' (अब केनरा बैंक) के बीच यह व्यापारिक विवाद 1978 से लंबित था।
निर्णय: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष इस करीब 5 दशक पुराने मामले को आपसी मध्यस्थता से हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया।
इस पहल का उद्देश्य
सुप्रीम कोर्ट की इस विशेष पहल का मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करना, न्यायिक समय बचाना और वादियों को बिना किसी हार-जीत की कड़वाहट के त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करना था।
तकनीक का इस्तेमाल: इस केस के एक मुख्य प्रतिवादी (मोहम्मद तौसीफ) वर्तमान में दुबई में रहते हैं। उन्होंने वहां हिंदी में तैयार समझौता-पत्र का प्रिंट निकालकर हस्ताक्षर किए और व्हाट्सऐप (WhatsApp) पर स्कैन कॉपी भारत भेजी।
निर्णय: जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने इस डिजिटल सहमति को स्वीकार किया। इसके तहत अपीलकर्ता को 53% उत्तरी हिस्सा और प्रतिवादी को 47% दक्षिणी हिस्सा मिला। [1]
सऊदी अरब से जुड़ा 48 साल पुराना वाणिज्यिक विवाद:मामला: 'अलमस्तानीर एस्टैब्लिशमेंट फॉर ट्रेड बनाम सिंडिकेट बैंक' (अब केनरा बैंक) के बीच यह व्यापारिक विवाद 1978 से लंबित था।
निर्णय: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष इस करीब 5 दशक पुराने मामले को आपसी मध्यस्थता से हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया।
इस पहल का उद्देश्य
सुप्रीम कोर्ट की इस विशेष पहल का मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करना, न्यायिक समय बचाना और वादियों को बिना किसी हार-जीत की कड़वाहट के त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करना था।




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