सावन पूर्णिमा पर रामलला का झूला उतर जाने के बाद भी वे दर्शन से वंचित रह गए।
राम मंदिर परिसर या मुख्य द्वार के सामने स्वर्गीय त्रिलोकीनाथ पांडेय की आदमकद प्रतिमा लगाई जाए।
परिवार के किसी सदस्य को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सम्मानजनक पद दिया जाए।
अयोध्या: 30 अगस्त 2026
राम जन्मभूमि मामले में ‘रामलला के सखा’ (नेक्स्ट फ्रेंड) के रूप में करीब 34 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ने वाले स्वर्गीय पंडित त्रिलोकीनाथ पांडेय के परिवार को सावन झूला मेले के दौरान अयोध्या पहुंचने पर भी रामलला के दर्शन नहीं मिल सके। चार दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर भटकने और व्यवस्था न हो पाने के कारण परिवार ने गहरी नाराजगी और पीड़ा व्यक्त की है। सावन पूर्णिमा पर रामलला का झूला उतर जाने के बाद भी वे दर्शन से वंचित रह गए। इस घटना के बाद त्रिलोकीनाथ पांडेय के बेटे अमित पांडेय, अरविंद पांडेय और पत्नी कमलादेवी ने अपनी मांगें सामने रखी हैं:
योगदान को सम्मान: राम मंदिर परिसर या मुख्य द्वार के सामने स्वर्गीय त्रिलोकीनाथ पांडेय की आदमकद प्रतिमा लगाई जाए।
ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व: परिवार के किसी सदस्य को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सम्मानजनक पद दिया जाए। विशिष्ट दर्शन व्यवस्था: उनके आश्रितों और शुभचिंतकों के लिए विशिष्ट दर्शन पास और एक निर्धारित समय पर सुलभ दर्शन की स्थाई व्यवस्था की जाए। पंडित त्रिलोकीनाथ पांडेय ने वर्ष 1994 से लेकर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक अदालत में 'रामलला विराजमान' के सखा के रूप में मुकदमों की पैरवी की थी और 24 सितंबर 2021 को उनका निधन हो गया था।
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