उधर गजानन भागे डरकर पहुचे शम्भु निकट चिल्लाये
बोले बाबा मुझे बचाओ , इस नन्दी के सीग कटाओ
कानपुर:25 अगस्त 2026
अनूप कुमार शुक्ल " अनूप "
***** सावन का सोमवार *****
एक बार कैलाश शिखर पर ,
देखा गया दृश्य अतिसुन्दर |
लम्बोदर दल बेल के लाये ,
जिन्हे देख नन्दी ललचाये |
लपके लम्बे लम्बे डग भर ,
उधर गजानन भागे डरकर |
पहुचे शम्भु निकट चिल्लाये,
तब तक नन्दी भी नियराये |
बोले बाबा मुझे बचाओ ,
इस नन्दी के सीग कटाओ |
बेलपत्र शिव आगे रखकर,
आप गुफा मे छिपे लपककर |
शंकर जी नन्दी को लख कर ,
सोचा चला मारने तन कर |
नन्दी के सिर पत्थर मारा ,
डूडा हुआ बैल बेचारा |
पर देखा नन्दी पत्तो पर ,
टूट पडा गणपति को तज कर |
तब गणपति को पास बुलाया,
झूठा भय था ये समझाया |
नन्दी के सिर रक्त देखकर ,
बोले उसको सम्बोधित कर |
अब मत कभी इन्हे डरवाना ,
जिससे पडे सीग तुडवाना |
खैर सीग की यादगार मे ,
भक्त करे ब्रत सोमवार के |
श्रावण भर दल जाये चढाये,
जिससे तेरा पेट अघाये |
उसी सीग की यादगार है ,
सावन का यह सोमवार है |
जो"अनूप"दल बेल चढावे,
शिव को यह दिन याद दिलावे |
कैसा भी भय सच्चा झूठा ,
सावन मे ब्रत करे अनूठा |
मन्दिर मे ला दल बेल धरेगे ,
शिवजी सब भय दूर करेगे |
मैथा , कानपुर देहात




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