हाई कोर्ट में मथुरा के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट पेश होने की संभावना
कोर्ट द्वारा मामले से जुड़े मुकदमों की सुनवाई के लिए मुख्य बिंदु तय किए जा सकते हैं।
अंतिम फैसला आने तक विवादित स्थल पर नई गतिविधि या आयोजन पर रोक लगाने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में 21 से 23 अगस्त के बीच इस समझौते से जुड़ी पत्रावलियों पर सुनवाई होनी थीकानपुर: 25 अगस्त 2026
प्रयागराज: 25 अगस्त 2026
मथुरा के चर्चित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले में आज, 25 अगस्त 2026 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है।
इस सुनवाई से जुड़े मुख्य बिंदु और वर्तमान अपडेट्स इस प्रकार हैं:
आज की सुनवाई के मुख्य बिंदु
मथुरा DM और SSP की रिपोर्ट: आज हाई कोर्ट में मथुरा के जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) की रिपोर्ट पेश होने की संभावना है।
अंतरिम रोक की मांग: वादी आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दायर एक प्रार्थना पत्र पर सुनवाई होगी, जिसमें अंतिम फैसला आने तक विवादित स्थल पर किसी भी नई गतिविधि या आयोजन पर रोक लगाने की मांग की गई है।
सुनवाई के बिंदु तय होना: कोर्ट द्वारा इस पूरे मामले से जुड़े मुकदमों की सुनवाई के लिए मुख्य बिंदु तय किए जा सकते हैं।
मुकदमों का ट्रांसफर: मथुरा जिला अदालत से ट्रांसफर होकर आए कुल 18 मुकदमों पर एक साथ सुनवाई चल रही है।
समझौता वार्ता का क्या हुआ: लोक अदालत में सुलह विफल: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर स्थानीय स्तर पर विशेष लोक अदालत के माध्यम से सुलह-समझौते के 3 प्रयास किए गए।
मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति: हिंदू पक्ष के अनुसार, 18 अगस्त को हुई आखिरी वार्ता में मुस्लिम पक्ष का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा, जिसके बाद लोक अदालत ने इस समझौते को विफल करार दे दिया।
सुप्रीम कोर्ट में टली सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट में 21 से 23 अगस्त के बीच इस समझौते से जुड़ी पत्रावलियों पर सुनवाई होनी थी, लेकिन अत्यधिक मामलों (लगभग 15 हजार पत्रावली) के कारण इसका नंबर नहीं आ सका। इसी वजह से अब सबकी नजरें हाई कोर्ट की इस कार्यवाही पर टिकी हैं।
दोनों पक्षों के मुख्य दावे हिंदू पक्ष: उनका दावा है कि शाही ईदगाह मस्जिद को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। वे इस जमीन के पूर्ण स्वामित्व और ढांचे को हटाने की मांग कर रहे हैं।
मुस्लिम पक्ष: शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी इन याचिकाओं का विरोध कर रही है और 1991 के उपासना स्थल अधिनियम का हवाला देते हुए सभी मुकदमों को खारिज करने की मांग कर रही है।




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