उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं में बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा
जहां 25 वर्ष के लगभग 40% ग्रेजुएट्स नौकरी की तलाश में
सर्वे इंडिया टुडे और सी-वोटर द्वारा अगस्त 2026 में किया गया
नीति आयोग 2026 और अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी 'स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026' रिपोर्ट में भी मेल
नई दिल्ली: 27 अगस्त 2026
'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे में 32% युवाओं ने स्पष्ट रूप से माना है कि देश में 'नौकरियों की कमी' (Not enough jobs) सबसे बड़ी समस्या है।
32% युवा: नौकरियों की बुनियादी कमी को सबसे बड़ी बाधा मानते हैं।
22% युवा: देश की शिक्षा व्यवस्था को अपनी सबसे बड़ी चिंता मानते हैं।
18% युवा: वेतन (Salaries) के बहुत कम होने से परेशान हैं।
17% युवा: योग्यता और नौकरी के बीच मिसमैच (Qualification-Job Mismatch) को बड़ी समस्या मानते हैं।
17% युवा: सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और अनियमितताओं को मुख्य कारण मानते हैं।
12% युवा: महंगाई और रहने-सहने के बढ़ते खर्च से चिंतित हैं।
8.7 करोड़ युवा बाहर: 15 से 29 साल की उम्र के करीब 8.7 करोड़ युवा 'NEET' श्रेणी में हैं, यानी वे न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न नौकरी में हैं और न ही कोई ट्रेनिंग ले रहे हैं।
डिग्री बनाम रोजगार: नीति आयोग के अनुसार, देश में केवल 8.25% ग्रेजुएट्स को ही उनकी योग्यता के अनुसार काम मिल पा रहा है, क्योंकि अधिकांश डिग्रियों में प्रैक्टिकल और इंडस्ट्री-अलाइन ट्रेनिंग की कमी है।
शिक्षित बेरोजगारी: उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं में बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा है, जहां 25 वर्ष के लगभग 40% ग्रेजुएट्स नौकरी की तलाश में संघर्ष कर रहे हैं।
यह सर्वे इंडिया टुडे और सी-वोटर द्वारा अगस्त 2026 में किया गया है, जो युवाओं (Gen-Z) के बीच रोजगार और करियर को लेकर बढ़ रही गंभीर चिंताओं को दर्शाता है।
सर्वे के मुख्य बिंदु: युवाओं की सबसे बड़ी चिंताएं
सर्वेक्षण में युवाओं ने रोजगार से जुड़े कई पहलुओं को अपनी चिंता का कारण बताया
नीति आयोग और अन्य रिपोर्टों के चौंकाने वाले आंकड़े
यह सर्वे नीति आयोग की 2026 की रिपोर्ट और अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की 'स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026' रिपोर्ट के आंकड़ों से भी मेल खाता है ।




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