700 वर्ग फीट में फैला रेस्टोरेंट नहीं, उत्तर प्रदेश की राजनीति, साहित्य और पत्रकारिता का सबसे बड़ा केंद्र
मोबाइल और टेलीफोन के दौर से पहले, खबरों का मुख्य केंद्र हुआ करता था
एक कोना राजनेताओं के लिए और दूसरा कोना साहित्यकारों के लिए आरक्षित
को-ऑपरेटिव के अधिकारियों का कहना है कि इन दिक्कतों को सुलझाकर इसे जल्द ही दोबारा खोला जाएगा
लखनऊ: 29 अगस्त 2026
कानपुर:29 अगस्त 2026
लखनऊ का 88 साल पुराना ऐतिहासिक 'इंडियन कॉफी हाउस' स्टाफ की दिक्कतों के कारण अस्थाई रूप से बंद हो गया है। हजरतगंज में स्थित 700 वर्ग फीट में फैला यह कॉफी हाउस महज एक रेस्टोरेंट नहीं, बल्कि दशकों तक उत्तर प्रदेश की राजनीति, साहित्य और पत्रकारिता का सबसे बड़ा केंद्र रहा है।
इस ऐतिहासिक स्थल से जुड़ी प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
इस्तीफा देकर सीधे पहुंचे सीएम: साल 1988 में जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दिया, तो वे बिना किसी सुरक्षा तामझाम के सीधे इसी कॉफी हाउस पहुंचे थे।
टंडन की पाठशाला: भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन ने अपनी राजनीति की शुरुआत यहीं से की थी और वे इसे अपनी 'राजनीति की पाठशाला' मानते थे।
साहित्यकारों और पत्रकारों का गढ़ बौद्धिक विमर्श का केंद्र: मोबाइल और टेलीफोन के दौर से पहले, यह शहर की खबरों का मुख्य केंद्र हुआ करता था। यहाँ का एक कोना राजनेताओं के लिए और दूसरा कोना साहित्यकारों के लिए आरक्षित रहता था।
दिग्गज लेखक: अमृतलाल नागर, यशपाल और मजाज जैसे महान साहित्यकार और कवि यहाँ बैठकर अपनी नई रचनाओं पर चर्चा और बहस करते थे।
बंद होने का कारण और मौजूदा स्थिति सहकारी समिति द्वारा संचालन: यह एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान न होकर 'इंडियन कॉफी वर्कर्स को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड' द्वारा संचालित एक सहकारी संस्थान है।




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