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लिव-इन रिलेशनशिप सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर व्यक्तिगत स्वतंत्रता को मजबूत करने की दिशा में प्रगतिशील कदम : दिल्ली हाई कोर्ट

माता-पिता, या रिश्तेदारों  का दखल   स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करने का अधिकार नहीं 
 धमकियों के मद्देनजर, हाई कोर्ट ने  पुलिस कोकपल को कड़ी सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया। 
अदालत: "सामाजिक नैतिकता और पूर्वाग्रह"  मौलिक अधिकारों को सीमित नहीं कर सकते। 
आधुनिक समाज में वयस्क नागरिकों की व्यक्तिगत पसंद और गरिमा सर्वोपरि 

कानपुर:22 अगस्त 2026
दिल्ली :22 अगस्त 2026
दिल्ली हाई कोर्ट का लिव-इन रिलेशनशिप पर आया फैसला सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर व्यक्तिगत स्वतंत्रता को मजबूत करने की दिशा में एक बेहद प्रगतिशील कदम है। जस्टिस सौरभ बनर्जी की पीठ ने अगस्त 2026 में स्पष्ट किया कि दो बालिगों के बीच आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप विवाह के समान है।  जब दो वयस्क अपनी जिम्मेदारी पर साथ रहने का फैसला करते हैं, तो माता-पिता, रिश्तेदारों या दोस्तों को उनकी पसंद में दखल देने या उनके जीवन और स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करने का कोई अधिकार नहीं है।
यह फैसला सामाजिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोणों से बेहद महत्वपूर्ण है:
1. मौलिक अधिकारों की सुरक्षा (Protection of Fundamental Rights)
1. मौलिक अधिकारों की सुरक्षा (मौलिक अधिकारों का संरक्षण)अनुच्छेद 21 का सम्मान: कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। लिव-इन कपल्स को भी यह अधिकार समान रूप से प्राप्त है।
सुरक्षा का आदेश: परिवार से मिल रही धमकियों के मद्देनजर, हाई कोर्ट ने स्थानीय पुलिस को इस कपल को कड़ी सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया। 
2. सामाजिक नैतिकता बनाम कानूनी अधिकार पहचान और स्वायत्तता: अदालत ने दृढ़ता से कहा कि "सामाजिक नैतिकता और पूर्वाग्रह" किसी भी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों को सीमित नहीं कर सकते। 
हस्तक्षेप पर रोक: समाज या परिवार के पास वयस्कों के निजी जीवन के फैसलों में अड़चन डालने की कोई कानूनी शक्ति नहीं है। 
3. कानूनी मान्यता की सुदृढ़ता कानूनी पवित्रता: कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों और घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 का हवाला दिया, जो बिना शादी के भी साथ रहने वाले वयस्कों के अधिकारों को मान्यता देते हैं।
पार्टनर चुनने की आजादी: यह फैसला देश के युवाओं को बिना किसी बाहरी दबाव या डर के अपना जीवनसाथी चुनने की पूरी आजादी की वकालत करता है।
 ऐतिहासिक निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि आधुनिक समाज में वयस्क नागरिकों की व्यक्तिगत पसंद और गरिमा सर्वोपरि है।
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