जनसंख्या नियंत्रण के राज्य के नीतिगत उद्देश्यों को भी बढ़ावा
मातृत्व अवकाश का अधिकार जीवित बच्चों की संख्या (अधिकतम दो) पर निर्भर
कानपुर: 11 अगस्त 2026
प्रयागराज: 11 अगस्त 2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी महिला सरकारी कर्मचारी की पहले से ही दो या अधिक जीवित संतानें हैं, तो वह चौथी संतान के लिए मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) की पात्र नहीं होगी। कोर्ट ने कहा कि भले ही महिला किसी विशेष प्रसव के लिए पहली बार अवकाश मांग रही हो, लेकिन दो से अधिक जीवित बच्चे होने पर यह लाभ नहीं दिया जा सकता।
यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने शशि कुमारी नामक महिला कर्मचारी की याचिका को खारिज करते हुए दिया।
मामले के मुख्य बिंदु और कोर्ट की टिप्पणी:
नियमों की व्याख्या: राज्य के सेवा नियमों के अनुसार, दो से अधिक जीवित संतान होने की स्थिति में महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश की पात्रता से बाहर रखा गया है, ताकि जनसंख्या नियंत्रण के राज्य के नीतिगत उद्देश्यों को भी बढ़ावा दिया जा सके।
हाईकोर्ट का फैसला: कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियम के तहत मातृत्व अवकाश का अधिकार जीवित बच्चों की संख्या (अधिकतम दो) पर निर्भर करता है, न कि इस बात पर कि कर्मचारी ने पहले कितनी बार अवकाश का लाभ उठायाहै।
याचिकाकर्ता का तर्क: याचिकाकर्ता शशि कुमारी ने विभाग के 19 जून 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें चौथे बच्चे के लिए 6 महीने का मातृत्व अवकाश देने से मना कर दिया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि उन्होंने अपनी पहली तीन संतानों के जन्म पर कोई मातृत्व अवकाश नहीं लिया था और वह चौथी संतान के लिए पहली बार इस लाभ की मांग कर रही हैं, इसलिए विभाग का इनकार गलत है।




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