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आगरा और आस-पास के क्षेत्रों में शिवभक्तों की अगाध श्रद्धा : कांवड़ियों ने समय की सीमा को चुनौती दी, स्थानीय भक्तों ने कठिनाइयों के बीच आस्था की परिक्रमा पूरी की।

 खराब सड़कें, जलभराव और नुकीली गिट्टियां बिखरी हुई थीं, जिसने भक्तों की परीक्षा ली।
नुकीले पत्थरों और गड्ढों के कारण कई श्रद्धालुओं के पैरों में छाले पड़ गए और चोटें आईं
 "बम-बम भोले" और "हर-हर महादेव" के जयकारों के बीच उत्साह कम नहीं और  परिक्रमा पूरी की।
कानपुर: 4 अगस्त 2026
आगरा: 4 अगस्त 2026
सावन के पवित्र महीने में आगरा और आस-पास के क्षेत्रों में शिवभक्तों की अगाध श्रद्धा के दो अद्भुत और प्रेरक रूप देखने को मिले हैं, जहाँ एक ओर डाक कांवड़ियों ने समय की सीमा को चुनौती दी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय भक्तों ने भारी कठिनाइयों के बीच अपनी आस्था की परिक्रमा पूरी की।
इन दोनों धार्मिक यात्राओं और शिवभक्तों के समर्पण का विवरण नीचे दिया गया है:
24 घंटे में हरिद्वार से आगरा: डाक कांवड़ की ऐतिहासिक दौड़
65 शिवभक्तों का दल: आगरा के स्थानीय 65 शिवभक्तों के एक जत्थे ने बेहद कठिन और निरंतर दौड़ने वाली डाक कांवड़ लाने का संकल्प लिया।
समय सीमा: इन भक्तों ने बिना रुके, निरंतर दौड़ते हुए हरिद्वार से आगरा की दूरी मात्र 24 घंटे में पूरी की।
जलाभिषेक: आगरा पहुँचते ही इन भक्तों ने गंगाजल से प्राचीन शिवलिंग पर जलाभिषेक कर अपनी मन्नत पूरी की।सावन का दूसरा सोमवार: 44 किलोमीटर की कठिन परिक्रमा
ऐतिहासिक परिक्रमा: सावन के दूसरे सोमवार के पावन अवसर पर आगरा के हजारों श्रद्धालुओं ने 44 किलोमीटर लंबी शहर की चारों कोनों की परिक्रमा शुरू की।
बदहाल रास्तों की चुनौती: इस धार्मिक यात्रा के मार्ग में खराब सड़कें, जलभराव और नुकीली गिट्टियां बिखरी हुई थीं, जिसने भक्तों की परीक्षा ली।पैरों में छाले, पर हौसला अडिग: नुकीले पत्थरों और गड्ढों के कारण कई श्रद्धालुओं के पैरों में छाले पड़ गए और चोटें आईं, लेकिन "बम-बम भोले" और "हर-हर महादेव" के जयकारों के बीच भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ और उन्होंने परिक्रमा पूरी की।ये दोनों घटनाएं दर्शाती हैं कि तमाम प्रशासनिक कमियों और मार्ग की दुर्दशा के बावजूद, शिवभक्तों की आस्था और संकल्प शक्ति हर बाधा पर भारी पड़ी।

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