चाय दुकान कर्मचारी ने बांधकर 7 वर्षीय बहन के साथ किया बलात्कार: 10 वर्षीय लड़के का आरोप
उत्तर प्रदेश फतेहपुर में एक पुलिस कांस्टेबल पर भी एक छात्रा से दुष्कर्म का आरोप
भारतीय न्याय संहिता की धारा 65: बलात्कार संज्ञेय अपराध: बिना वारंट के जांच
बारह वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ बलात्कार: कम से कम 20 साल तक की कैद
कानपुर:18 अप्रैल 2026
कानपुर में एक चाय की दुकान के कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगाया गया है। एक 10 वर्षीय लड़के ने बताया कि उस कर्मचारी ने उसे बांधकर उसकी 7 वर्षीय बहन के साथ बलात्कार किया। यह घटना सचेंडी थाना क्षेत्र में घटित हुई, जहां आरोपी ने बच्चों को खेलने के लिए बुलाया और फिर लड़के को बांधकर लड़की के साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने रोते हुए अपने माता-पिता को बताया और इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस में की गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
उत्तर प्रदेश फतेहपुर में एक पुलिस कांस्टेबल पर भी एक छात्रा से दुष्कर्म का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने छात्रा को नौकरी का झांसा देकर उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। मामले की जांच चल रही है और आरोपित को जल्द गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है।
चाय दुकानों से जुड़ी और भी कई घटनाएं सामने आ रही हैं, जैसे कि फतेहपुर में चाय को लेकर विवाद ने हिंसक रूप धारण कर लिया था। वहां कुछ दबंगों ने चाय दुकानदार और उसके परिवार पर हमला किया। चाय दुकानदार ने अधिकारियों पर लगातार उत्पीड़न का भी आरोप लगाया है, जिसके कारण उसने अपनी दुकान बंद करने का निर्णय लिया। स्पष्ट होता है कि चाय की दुकानों के वातावरण में न केवल अपराध बढ़ रहे हैं बल्कि दुकानदारों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह सब घटनाएं समाज में महिलाओं और बच्चों के प्रति हिंसा की गंभीर स्थिति को दर्शाती हैं।
कम उम्र की लड़की से बलात्कार की धारा 65 में सजा और जमानत |
बलात्कार एक ऐसा घिनौना अपराध है जो किसी की भी इंसान की जिंदगी को पूरी तरह से तबाह कर देता है। यह सिर्फ एक शारीरिक हमला नहीं है, बल्कि यह एक महिला के मन और आत्मा पर एक गहरा घाव छोड़ जाता है, जो शायद कभी न भरे। आजकल हम बलात्कार के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देख रहे हैं, जो हमारे समाज के लिए एक बहुत बड़ी चिंता की बात है। खासकर जब बात कम उम्र की लड़कियों के साथ होने वाले बलात्कार की आती है, तो यह और भी ज़्यादा दुखद और चिंताजनक हो जाता है।
नाबालिग से बलात्कार बीएनएस की धारा 65 क्या है इस धारा के लगने के प्रावधान, सजा और जमानत?
हमारे देश में कम उम्र की लड़कियों के साथ होने वाले बलात्कार के अपराधों में पहले आईपीसी की धारा 376(3) और 376(ab) लागू होती थी। लेकिन BNS के आने के बाद से ऐसे गंभीर मामलों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 65 लागू कर सजा की कार्यवाही की जाने लगी है। इन कानूनी बदलावों के बाद बलात्कार जैसे मामलों में दोषियों को सजा देने के लिए पहले से ज्यादा व सख्त प्रावधान बना दिए गए है। जिनको आसान भाषा में जानने व समझने के लिए इस लेख को पूरा पढ़े।
बीएनएस की धारा 65 क्या है
भारतीय न्याय संहिता की धारा 65 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी लड़की के साथ जबरदस्ती यौन संबंध बनाता है, तो वह बलात्कार के अपराध का दोषी होगा। वैसे तो बलात्कार के अपराध के लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 63 व 64 लागू होती है। लेकिन यह धारा विशेष रूप से कम उम्र की लड़कियों के साथ होने वाले बलात्कार के अपराधों के बारे में बताती है। इसका कारण यह है कि कानून यह मानता है कि छोटी उम्र में लड़कियाँ यौन शोषण के लिए ज्यादा संवेदनशील होती हैं।
काम उम्र की लड़कियों के लिए यह समझ पाना कि किसी कार्य के लिए सहमति देनी चाहिए या नहीं, उनके लिए मुश्किल हो सकता है। इसलिए कम उम्र की लड़कियों को इस तरह के अपराधों से बचाने के लिए यह धारा खासतौर पर बनाई गई है।
भारतीय न्याय संहिता की धारा 65 के तहत किए जाने वाले अपराध को इसकी 2 उपधाराओं में बताया गया है:
उपधारा 1: सोलह वर्ष से कम आयु की महिला के साथ बलात्कार
यह उपधारा तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति सोलह वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ बलात्कार करता है। बलात्कार को भारतीय कानून में एक गंभीर अपराध माना जाता है।
उपधारा 2: बारह वर्ष से कम आयु की महिला के साथ बलात्कार
यह उपधारा तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति बारह वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ बलात्कार करता है। बारह वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ बलात्कार को और भी गंभीर अपराध माना जाता है, क्योंकि इस उम्र की लड़की शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत कमजोर होती है और उसे इस तरह के हादसे से निकल पाना उनके लिए बहुत मुश्किल होता है।
बीएनएस धारा 65 के अपराध को साबित करने वाली मुख्य बातें
बीएनएस धारा 65, जो बलात्कार से संबंधित है, इसके तहत किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें साबित करनी होती हैं। आइये इन महत्वपूर्ण बातों को सरल भाषा में समझते है:\
पीड़िता की उम्र: सबसे पहले यह देखना ज़रूरी है कि पीड़िता की उम्र कितनी है। अगर पीड़िता 16 साल से कम उम्र की है, तो यह धारा लागू होती है। अगर पीड़िता 12 साल से भी कम उम्र की है, तो अपराध और भी गंभीर माना जाता है।
बलात्कार की घटना: यह साबित करना ज़रूरी है कि वास्तव में बलात्कार हुआ था। इसका मतलब है कि आरोपी ने पीड़िता के साथ उसकी मर्ज़ी के बिना शारीरिक संबंध बनाए। इसे साबित करने के लिए पीड़िता का बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
आरोपी की पहचान: यह साबित करना ज़रूरी है कि बलात्कार करने वाला व्यक्ति वही है जिस पर आरोप लगाया जा रहा है। पीड़िता अगर आरोपी को पहचानती है, तो उसकी गवाही बहुत महत्वपूर्ण होती है।
पीड़िता की हालत: ऐसे मामलों में यह देखना भी ज़रूरी है कि बलात्कार के बाद पीड़िता की शारीरिक और मानसिक हालत कैसी है। जिसके लिए मेडिकल जाँच करवाकर यह देखा जाता है कि पीड़िता को कोई चोट तो नहीं लगी है।
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भारतीय न्याय संहिता की धारा 65 का आपराधिक उदाहरण
रिया नाम की एक 12 साल की लड़की अपने माता-पिता के साथ एक शहर में रहती थी। उसी शहर में राकेश नाम का उनका एक रिश्तेदार भी रहता था, और वह अक्सर रिया के घर पर आता जाता था। एक दिन राकेश रिया को बहला-फुसलाकर अपने साथ कही ले जाता है। वह रिया को एक सुनसान जगह पर ले जाता है और उसके साथ बलात्कार कर देता है। रिया के घर पर जब इस बात का पता चलता है, तो वह राकेश की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाते है। जिसके बाद राकेश पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 65 के तहत कार्यवाही की जाती है।
भारतीय न्याय संहिता की धारा 65 के दोषी को सजा कितनी होती है
बीएनएस की धारा 229 की सजा को अपराध की गंभीरता व पीड़िता की उम्र के अनुसार इसकी दो अलग-अलग उपधाराओं में बताया गया है, जो कि इस प्रकार है:
उपधारा 1 के तहत सजा: यदि कोई व्यक्ति सोलह वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ बलात्कार करता है, तो उसे कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसमें कम से कम 20 साल की कैद से लेकर आजीवन कारावास की कैद तक की सजा दी जा सकती है। इसके अलावा दोषी को जुर्माना भी देना होगा, उस जुर्माने का इस्तेमाल पीड़िता के इलाज के लिए किया जाएगा।
उपधारा 2 के तहत सजा: यदि कोई व्यक्ति बारह वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ बलात्कार करता है, तो उसे भी कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसमें कम से कम 20 साल तक की कैद जिसे आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक भी बढ़ाया जा सकता है। इसमें भी दोषी पर कैद की सजा के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
बीएनएस की धारा 65 में जमानत के लिए क्या कानूनी प्रावधान होता है?
भारतीय न्याय संहिता की धारा 65 के तहत बलात्कार एक संज्ञेय अपराध है। इसका मतलब है कि पुलिस के पास बिना वारंट के आरोपी को गिरफ्तार करने का अधिकार है। पुलिस ऐसे गंभीर मामलों में बिना वारंट के जांच शुरू कर सकती हैं और आरोपी को गिरफ्तार कर सकती हैं। इसके अलावा सेक्शन 65 एक गैर-जमानती सेक्शन है। इसका मतलब है कि इस अपराध के आरोपी को जमानत नहीं मिल सकती है।
इस धारा के साथ लगने वाली अन्य धाराएं:
18 साल से अधिक उम्र की लड़की से बीएनएस धारा 64
सामूहिक बलात्कार करना बीएनएस धारा 70
धोखे से शारीरिक संबंध बनाना बीएनएस धारा 69
लड़की पर हमला करना बीएनएस धारा 74
लड़की की हत्या करना बीएनएस धारा 103
धारा 65 लगने पर बचाव के उपाय
शांत रहें: यदि आप पर आरोप लगाया जाता है, तो शांत रहें और घबराएं नहीं।
वकील से सलाह लें: किसी भी कानूनी कार्यवाही में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप एक अनुभवी वकील से सलाह लें। एक वकील आपको आपकी स्थिति के बारे में सही सलाह दे सकता है और आपको बचाव के लिए सबसे अच्छे तरीके के बारे में बता सकता है।
झूठे आरोप से बचाव: यदि आपको लगता है कि आपको गलत तरीके से फंसाया जा रहा है, तो यह साबित करने की कोशिश करें कि आप घटना के समय कहीं और थे। आपके पास गवाह, सीसीटीवी फुटेज, या अन्य सबूत हो सकते हैं जो आपकी बात को साबित करते हैं।
झूठी शिकायत से बचाव: यदि आपको लगता है कि शिकायतकर्ता ने झूठी शिकायत दर्ज कराई है, तो आप पिछली घटनाओं व उनके इरादों के बारे में अपने वकील को बता सकते है।
सबूतों से छेड़छाड़ से बचाव: यदि आपको लगता है कि सबूतों से छेड़छाड़ की गई है, तो आप फोरेंसिक जाँच की माँग कर सकते हैं और सबूतों की जांच करवा सकते हैं।
इस धारा के तहत कानूनी शिकायत कैसे करें
यदि आपके साथ या आपके किसी जानने वाले के साथ यह अपराध हुआ है, तो आप निम्नलिखित तरीके से कानूनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं:
पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराएं : सबसे पहले आपको नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर घटना की रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए। रिपोर्ट में आपको घटना की पूरी जानकारी, जैसे कि कब, कहाँ, और कैसे हुआ, बताना होगा। आपको अपनी पहचान और आरोपी के बारे में भी जानकारी देनी होगी।
चिकित्सा जांच कराएं: यदि आप शारीरिक रूप से घायल हैं, तो आपको तुरंत चिकित्सा जांच करानी चाहिए। मेडिकल रिपोर्ट कानूनी कार्यवाही में एक महत्वपूर्ण सबूत के रूप में काम करेगी।
वकील से सलाह लें: आपको एक अनुभवी वकील से सलाह लेनी चाहिए जो आपको कानूनी प्रक्रिया के बारे में मार्गदर्शन कर सके। वकील आपको FIR दर्ज कराने, सबूत इकट्ठा करने और अदालत में अपना मामला पेश करने में मदद करेगा।
राष्ट्रीय महिला आयोग या राज्य महिला आयोग से संपर्क करें : ऐसे अपराध का शिकार होने पर आप राष्ट्रीय महिला आयोग या राज्य महिला आयोग से भी संपर्क कर सकती हैं। ये आयोग महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में मदद करते हैं।




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