प्रमुख योजना गोरखपुर को एक "सोलर सिटी" के रूप में विकसित
22,000 मेगावाट ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स की योजना
उत्तर प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना
पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदमकानपुर:20 मार्च 2026
लखनऊ:20 मार्च 2026
मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में सोमवार को लोकभवन में संपन्न हुई कैबिनेट बैठक में कुल 39 प्रस्ताव पेश किए गए। इनमें से 37 प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई, जबकि दो प्रस्ताव (संख्या 20 और 21) को फिलहाल स्थगित कर दिया गया। इस बैठक का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु प्रदेश के किसान रहे।सरकार ने आगामी रबी विपणन सत्र के लिए गेहूं खरीद की नीति स्पष्ट की, जिससे अन्नदाताओं की आय में सीधे लाभ की संभावना बढ़ गई है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बैठक के बाद मीडिया को किसानों से जुड़े फैसलों की जानकारी दी। महत्वपूर्ण योजनाओ में एक प्रमुख योजना गोरखपुर को एक "सोलर सिटी" के रूप में विकसित करने की है। इस परियोजना के तहत गोरखपुर के चिलुआताल में 20 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए कुल 140 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
यह फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट चिलुआताल के पानी की सतह पर स्थापित किया जाएगा, जो भारत में अपनी तरह की एक अनोखी पहल है। इस परियोजना के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 38.54 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। सीएम योगी का उद्देश्य राज्य में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना है, जिससे ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
किसानों के लिए अतिरिक्त फंड
कैबिनेट ने किसानों के लिए भी नई योजनाओं पर चर्चा की है, जिसमें उन्हें अतिरिक्त फंड और सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। सरकार का लक्ष्य कृषि क्षेत्र में सुधार और आधुनिकता को बढ़ावा देना है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
ट्रैफिक को कम करने के लिए नई योजनाएँ भी प्रस्तावित की गई हैं, जो गोरखपुर जैसे शहरों में यातायात की समस्या को हल करने में मदद करेंगी।
मुख्यमन्त्री उत्तर प्रदेश ने बताया कि उनकी सरकार राज्य को एक प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने उल्लेख किया कि 22,000 मेगावाट ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स की योजना बनाई गई है और इसके तहत जमीन भी चिन्हित की जा चुकी है।
सरकार का उद्देश्य इन सभी पहलों के माध्यम से उत्तर प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाना है।



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