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Tuesday, March 10, 2026

देश के अधिकांश शहरों में विशेष रूप से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, और हैदराबाद में LPG सिलेंडर का गम्भीर संकट

 सिलेंडर के लिए लंबी कतारें और बढ़ती कीमतें
सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए किया काम करना शुरू 
14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी
कानपुर:10 मार्च 2026
मध्य पूर्व में जब से संघर्ष तेज़ हुआ  भारत में LPG सिलेंडर संकट का गम्भीर संकट बना  गया है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने भारत में गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिसके परिणामस्वरूप कई शहरों में सिलेंडर के लिए लंबी कतारें और बढ़ती कीमतें देखने को मिली हैं।
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 62% आयात करता है, जिसमें से 85-90% हिस्सा होर्मुज जलडमरू मध्य से आता है। हाल के दिनों में इस जलडमरूमध्य में चल रहे संघर्ष ने आपूर्ति संबंधी चिंताओं को जन्म दिया है। इसके परिणाम स्वरूप, लोगों में घबराहट के चलते सिलेंडरों के लिए बुकिंग में तेज़ी आई और ब्लैक मार्केटिंग भी बढ़ी।
देश के अधिकांश शहरों में विशेष रूप से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, और हैदराबाद में होटल और रेस्तरां भारी संकट का सामना कर रहे हैं। कई होटल और रेस्टोरेंट के मालिकों ने संकट की गंभीरता को समझते हुए अपना कामकाज बंद करने की योजना बना ली है।
सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए काम करना शुरू किया है, जिससे कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति में कमी आई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने संबंध में एक आपात बैठक रखी है और एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमत में भी वृद्धि की गई है, जिसमें 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस संकट के बीच, कुछ उपभोक्ताओं ने बाजार में 1500 रुपये तक में गैस सिलेंडर खरीदने को मजबूर होना पड़ा है।
सरकार की ओर से यह कहा गया है कि देश में LPG की कोई वास्तविक कमी नहीं है। परंतु, उपभोक्ताओं की चिंता को देखते हुए, संकट की इस स्थिति ने ग्राहकों के मन में असुरक्षा का भाव पैदा कर दिया है, जिससे वे अधिक मात्रा में सिलेंडर बुकिंग करने लगे हैं।
 संकट भारत में गैस की आपूर्ति चेन का परीक्षण कर रहा है, और राष्ट्रपति तथा पेट्रोलियम मंत्री द्वारा निरंतर समीक्षा चल रही है। उद्योग और उपभोक्ताओं की मांग को संतुलित करने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए जाने की आवश्यकता है ताकि राजस्व के नुकसान और दैनिक जीवन पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव को कम से कम किया जा सके।

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