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Sunday, March 15, 2026

राज्यसभा की पांच सीटों के द्विवार्षिक चुनाव की तैयारी

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन के बीच तीव्र राजनीतिक हलचल
मुख्य विपक्षी दल राजद ने घोषित किया अमरेन्द्रधारी सिंह को अपना उम्मीदवार
राज्यसभा की पांचवीं सीट  के लिए 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता
महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं, जीत के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता
कानपुर:15 मार्च 2026
पटना:15 मार्च 2026
राज्य विधानसभा में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा की पांच सीटों के द्विवार्षिक चुनाव की तैयारियों के बीच राजग के घटक दलों के नेताओं ने शनिवार को संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी के आवास पर एक रणनीतिक बैठक की और रविवार को मॉक पोल कराने का फैसला किया।बैठक में एनडीए के पांच घटक दलों- भाजपा, जद (यू), लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के विधायक दलों के वरिष्ठ नेता और सचेतक शामिल हुए। उन्होंने कहा, ''सामूहिक रूप से रविवार को विजय कुमार चौधरी के आवास पर राज्यसभा चुनाव कराने का फैसला किया गया।इस चुनाव में प्रमुख गठबंधनों खासकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन के बीच तीव्र राजनीतिक हलचल दिखाई दे रही है।
एनडीए के घटक दलों ने शनिवार को पटना में एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी के आवास पर विभिन्न रणनीतियों पर चर्चा की गई। बैठक में शामिल नेताओं में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जद (यू) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे。 उन्होंने एक मॉक पोल आयोजित करने का निर्णय भी लिया है।
महागठबंधन की ओर से भी सक्रियता बढ़ी है, जहाँ वे अपने उम्मीदवारों को लेकर रणनीतियाँ बना रहे हैं। इस गठबंधन में मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) है, जिसने अमरेन्द्रधारी सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित किया है。
राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर दिलचस्पी बढ़ गई है। जीत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। वर्तमान में, एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जिसमें भाजपा के 89, जद (यू) के 85, और अन्य छोटे दलों के विधायक शामिल हैं。 महागठबंधन के पास केवल 35 विधायक हैं, जिससे उन्हें जीत के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाने की आवश्यकता है。
राज्यसभा चुनाव 2026 में इस बार की महत्वपूर्ण चर्चा पांचवीं सीट को लेकर ही है, क्योंकि इसे जीतने के लिए एनडीए को कुछ अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए होगा। दोनों पक्षों ने जीत को लेकर अपनी रणनीतियाँ तैयार की हैं और यह चुनाव बिहार की राजनीतिक मंच के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है。
राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने में लगे हुए हैं, और अब सबकी नजर 16 मार्च को मतदान पर टिकी हुई है, जब यह स्पष्ट होगा कि बिहार की पांचवीं राज्यसभा सीट पर विजय कौन प्राप्त करेगा।

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